कोरबा (पब्लिक फोरम)। दीपका नगर पालिका की कथित अनियमितताओं को उजागर करने वाले एक स्वतंत्र पत्रकार के परिवार पर उनकी अनुपस्थिति में हमला किया गया। पत्रकार उदय चौधरी, जो सर्व पत्रकार एकता महासंघ के जिलाध्यक्ष भी हैं, ने 16 मई को जिला पुलिस अधीक्षक, कोरबा को एक विस्तृत आवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच, परिवार का चिकित्सीय परीक्षण और सुरक्षा की मांग की है। साथ ही उन्होंने दीपका थाना पुलिस पर गंभीर पक्षपात का आरोप भी लगाया है।
खबर छापी, तो घर पर आ गई मुसीबत
उदय चौधरी वार्ड क्रमांक 11, दीपका के निवासी हैं। पेशे से AC मैकेनिक और सामाजिक दायित्व से पत्रकार। हाल ही में उन्होंने दीपका नगर पालिका से जुड़ी एक खबर प्रकाशित की थी – जिसमें अवैध वसूली, भवन तोड़ने के नोटिस और विवादित भूमि पर कार्रवाई जैसे संगीन आरोप थे।
खबर छपते ही बवाल मच गया। उदय चौधरी घर पर नहीं थे। इसी मौके का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने उनके परिवार पर हमला बोल दिया – मारपीट, धमकी और ईंट-पत्थर से। इतना ही नहीं, उनकी पत्नी को सार्वजनिक रूप से “टोनही” कहकर अपमानित भी किया गया – एक ऐसा शब्द जो छत्तीसगढ़ में महिलाओं के खिलाफ एक गहरा और क्रूर सामाजिक कलंक है।
घटना का वीडियो भी मौजूद है।

नाम सामने आए, जांच की मांग
चौधरी के आवेदन में जिन लोगों के नाम स्थानीय शिकायतों में सामने आए हैं, उनमें शामिल हैं-
– राजेंद्र राजपूत – नगर पालिका अध्यक्ष
– अविनाश सिंह राजपूत – वार्ड क्रमांक 11 के पार्षद
– अभिषेक सिंह राजपूत – पार्षद के भाई
– जितेश सिंह राजपूत – दीपका थाना ASI
– सुशील तिवारी
पत्रकार चौधरी ने इन सभी नामों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
थाने में पहुंचे, तो और दर्द मिला
घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने उदय चौधरी दीपका थाना पहुंचे – लेकिन वहां भी उन्हें न्याय की उम्मीद टूटती दिखी।
उनका आरोप है कि –
– एक गंभीर आपराधिक हमले को “आपसी विवाद” बनाकर दबाने की कोशिश की गई।
– उनकी पत्नी के बयान उनके शब्दों में नहीं, बल्कि अलग तरीके से दर्ज किए गए।
– वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद उसके आधार पर बयान नहीं लिखे गए।
– पत्नी और बच्चों का “MLC (मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट)” अब तक नहीं कराया गया – यह कहते हुए कि दीपका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं।
– जबकि दूसरे पक्ष का MLC करा दिया गया और उनके आधार पर कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई।
यह असंतुलन, यही पक्षपात है – उदय चौधरी का यही कहना है।
यह पहली बार नहीं है!
उदय चौधरी का कहना है कि जनहित के मुद्दे उठाने के कारण पहले भी उन पर हमले हो चुके हैं। उन हमलों की सूचना पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक कार्यालय को दी जा चुकी है। अभिषेक सिंह राजपूत और सुधीर चौधरी से जुड़ा एक पुराना मामला फिलहाल “कटघोरा न्यायालय में विचाराधीन” है।
यानी, धमकी नई नहीं – बस इस बार निशाना बदल गया। परिवार पर आया।
पाँच माँगें, एक आवाज़
उदय चौधरी ने SP से पांच स्पष्ट माँगें रखी हैं –
1. पूरे मामले की “उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच”
2. पत्नी और बच्चों का “तत्काल MLC”
3. उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर “दोषियों के खिलाफ कार्रवाई”
4. उन्हें और परिवार को “सुरक्षा”
5. जांच “दीपका थाने से अलग” किसी स्वतंत्र अधिकारी/एजेंसी से कराई जाए
इस आवेदन की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और IG बिलासपुर को भी भेजी गई है।
जब कलम की सज़ा परिवार भुगते
एक पत्रकार खबर लिखता है – सच को सामने लाने के लिए। उसकी पत्नी घर में होती है – निडर, अनजान। और फिर ईंटें आती हैं। अपमान आता है। “टोनही” जैसे शब्द आते हैं – जो छत्तीसगढ़ में एक महिला की इज्ज़त को मिट्टी में मिला देते हैं।
जब पत्रकारिता के बदले परिवार को निशाना बनाया जाए, तो यह सिर्फ एक हमला नहीं – यह एक संदेश है। “चुप हो जाओ।”
सवाल यह है कि जिला पुलिस अधीक्षक इस संदेश का क्या जवाब देते हैं।





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