रायपुर (पब्लिक फोरम)। एक तरफ थाली में महंगाई, दूसरी तरफ गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमत – और अब पेट्रोल-डीजल का बोझ भी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), छत्तीसगढ़ राज्य परिषद ने केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की दरों में की गई हालिया भारी बढ़ोतरी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी की चक्की में पिस रही जनता पर एक क्रूर आर्थिक प्रहार करार दिया है।
पार्टी के राज्य परिषद सदस्य पवन कुमार वर्मा ने कहा कि पिछले कई महीनों से खाद्यान्न और रोज़मर्रा की वस्तुओं के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। ऐसे में ईंधन और रसोई गैस की यह नई मूल्यवृद्धि मज़दूरों, किसानों, छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं की कमर पूरी तरह तोड़ देगी।
बेरोजगारी चरम पर, तनख्वाह वहीं की वहीं
कामरेड वर्मा ने कहा कि देश में बेरोजगारी अपने चरम पर है। आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त पड़ चुकी है। लघु और मध्यम उद्योग संकट में हैं – लेकिन मजदूरों की तनख्वाह में महंगाई के अनुपात में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं हुई। ऊपर से सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का अंधाधुंध निजीकरण आम आदमी को उसकी बुनियादी जरूरतों से भी महरूम करता जा रहा है।
जल-जंगल-जमीन पर कॉरपोरेट का दखल
सीपीआई ने देश के प्राकृतिक संसाधनों और खनिज संपदा पर बढ़ते कॉरपोरेट कब्जे पर भी गहरी चिंता जाहिर की। पार्टी का कहना है कि स्थानीय समुदायों और आदिवासी समाज के स्पष्ट विरोध के बावजूद खदानें और बड़ी परियोजनाएं धड़ल्ले से कॉरपोरेट घरानों को सौंपी जा रही हैं।
इसका सीधा असर आदिवासियों की जल, जंगल और जमीन पर पड़ रहा है – उनकी आजीविका छिन रही है। साथ ही बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई, पारिस्थितिकी तंत्र का विनाश और जलवायु परिवर्तन का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ जैसे वन-समृद्ध राज्य में इन नीतियों का दीर्घकालिक दुष्प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल स्रोतों पर विनाशकारी साबित होगा।
सीपीआई की पाँच प्रमुख माँगें
पार्टी ने केंद्र सरकार के सामने ये माँगें रखी हैं:
1. तत्काल राहत – पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की हालिया मूल्यवृद्धि फौरन वापस ली जाए और आवश्यक वस्तुओं पर वित्तीय राहत दी जाए।
2. खनिज नीति में बदलाव – खनन एवं प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन में ग्रामसभा की सहमति को अनिवार्य बनाया जाए।
3. पर्यावरण संरक्षण – जंगलों की कटाई पर रोक लगे और सभी परियोजनाओं में प्रभावी पर्यावरणीय मूल्यांकन व उचित क्षतिपूर्ति तंत्र लागू हो।
4. सतत विकास – विनाशकारी परियोजनाओं के बजाय स्थानीय समुदाय को लाभ पहुँचाने वाले टिकाऊ विकास मॉडल अपनाए जाएं।
5. जनसेवाओं की रक्षा – सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण बंद हो और कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत किया जाए।
सीपीआई नेता कॉमरेड वर्मा ने दो टूक कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी छत्तीसगढ़ और देश की मेहनतकश जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने केंद्र सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा – “जनजीवन की रक्षा के लिए तत्काल और दीर्घकालिक कदम उठाए जाएं, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।”





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