कोरबा (पब्लिक फोरम)। बांकी मोगरा के डेली मार्केट में पिछले 25 वर्षों से अपनी थाली सजाने वाले सैकड़ों सब्जी विक्रेताओं की जीविका पर आज संकट के बादल मंडरा रहे हैं। नगर पालिका परिषद द्वारा बाजार के पुनः निर्माण के नाम पर व्यवसायियों को नोटिस थमाए जाने के बाद आक्रोश की आग भड़क उठी है। भाजपा नेता भागवत विश्वकर्मा ने ऐलान किया है कि नगर पालिका की ओर से सकारात्मक पहल न होने पर **आज, 12 मई को दोपहर 3 बजे** सब्जी विक्रेताओं के साथ मिलकर नगर पालिका परिषद बाकी मोगरा का घेराव किया जाएगा।
25 साल की जिंदगी, एक नोटिस में दफन?
बाकी मोगरा का यह डेली मार्केट महज एक बाजार नहीं – यह दर्जनों परिवारों का पेट है। हर सुबह यहाँ की पगडंडियों पर टोकरी उठाकर आने वाली महिलाएँ, बुजुर्ग दुकानदार और युवा व्यापारी – सभी के लिए यही चार-पाँच फुट की जगह उनका आसमान है। “25 वर्षों से अनवरत चल रहे इस बाजार” को जब नगर पालिका ने पुनः निर्माण का हवाला देकर नोटिस भेजा, तो इन लोगों के पाँव तले जमीन खिसक गई।
नोटिस मिलने के बाद व्यवसायियों ने एकजुट होकर नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें नोटिस का जवाब और स्पष्टीकरण माँगा गया है।
विधायक को अंधेरे में रखकर भूमिपूजन का आरोप
भाजपा नेता भागवत विश्वकर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “क्षेत्रीय विधायक प्रेमचंद पटेल को धोखे में रखकर भूमिपूजन कराया गया है।” उन्होंने कहा-
“बाजार में आँगनबाड़ी केंद्र या कॉम्प्लेक्स बनाने की चर्चा है। विकास कार्यों का हम स्वागत करते हैं, लेकिन व्यापारियों का जबरन स्थानांतरण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
उनका स्पष्ट कहना है कि “घेराव की तैयारी पूरी हो चुकी है।” यदि नगर पालिका प्रशासन व्यवसायियों के हित में कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लेता, तो आज दोपहर 3 बजे नगर पालिका परिषद कार्यालय बाकी मोगरा को डेली मार्केट के व्यवसायियों के साथ घेर लिया जाएगा।
अब आगे क्या?
यह विवाद केवल एक बाजार का नहीं – यह उस व्यवस्था पर सवाल है जिसमें “विकास के नाम पर आम आदमी की रोटी छिन जाती है।” यदि नगर पालिका प्रशासन व्यापारियों के साथ संवाद स्थापित कर उनके वैकल्पिक पुनर्वास की ठोस योजना प्रस्तुत नहीं करता, तो यह विरोध आने वाले दिनों में और तीखा हो सकता है।
अब निगाहें टिकी हैं नगर पालिका के उस जवाब पर – जो तय करेगा कि बाकी मोगरा के इन हाथों की मेहनत को “सम्मान मिलेगा या विस्थापन।”





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