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मई दिवस की अगली सुबह मजदूरों पर बुलडोजर: वजीरपुर में 200 परिवार बेघर, भाकपा-माले ने की पीड़ितों से मुलाकात

नई दिल्ली (पब्लिक फोरम)। मजदूर दिवस की रात जब दुनिया मेहनतकशों के हक की बात कर रही थी, उसी रात और अगली सुबह दिल्ली के वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में बुलडोजर चल रहा था – उन्हीं मजदूरों के घरों पर, जिनके नाम पर यह दिन मनाया जाता है।

2 मई 2026 को एमसीडी, रेलवे प्रशासन और दिल्ली पुलिस की भारी तैनाती के साथ हुई इस कार्रवाई ने वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र के लगभग 200 परिवारों को एक झटके में बेघर और बेरोजगार कर दिया। न कोई पूर्व नोटिस, न पुनर्वास, न सरकारी मदद – सिर्फ मलबा और टूटे हुए सपने।

##भाकपा माले पहुंची पीड़ितों के बीच**

आज 3 मई को भाकपा (माले), ऐक्टू, ऐपवा और आइसा की संयुक्त टीम ने वजीरपुर का दौरा किया। भाकपा (माले) के पोलित ब्यूरो सदस्य एवं दिल्ली राज्य सचिव कॉमरेड रवि राय ने पीड़ित परिवारों से मिलकर उनके साथ एकजुटता जाहिर की।

##पीड़ितों की आवाज़ें – जो रुलाती हैं**

बुलडोजर से प्रभावित “रामेश्वरी देवी” ने बताया – “एक छोटी सी दुकान से गुजारा चलता था। बुलडोजर में सब कुछ दब गया। अब रोजगार का कोई साधन नहीं बचा।”
“पूजा”, जो 26 साल से वजीरपुर में रह रही थीं, कहती हैं – “न कोई नोटिस था, न कोई चेतावनी। बच्चों और सामान के साथ हम सड़क पर आ गए। सब कुछ उजड़ गया।”

“सुषमा देवी” ने बताया कि रात 1 बजे एमसीडी के कर्मचारी मलबे के साथ उनका घरेलू सामान भी उठाने लगे। बहुत विरोध के बाद सामान बचाया जा सका। “अब न छत है, न रोजगार, न खाना।”
“सरोज” की पीड़ा सबसे करारी है – “बुलडोजर में बच्चों की किताबें भी दब गईं। बच्चे रो रहे हैं। हम गरीब हैं, कहां से नई किताबें लाएं?”

##ये थे वजीरपुर के निवासी**

भाकपा माले की टीम ने पाया कि इस बस्ती में रहने वाले अधिकांश लोग सफाई कर्मचारी, फैक्ट्री मजदूर, गिग वर्कर, घरेलू कामगार, ई-रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर और रेहड़ी-पटरी लगाने वाले थे – यानी वही लोग, जिनकी मेहनत पर यह शहर टिका है। इनमें से किसी को भी अब तक पुनर्वास नहीं मिला है। कल से कई परिवारों ने खाना भी नहीं खाया।

##भाकपा माले की मांगें**
पार्टी ने सरकार से स्पष्ट और तत्काल मांगें रखी हैं:
– सभी पीड़ित परिवारों के लिए “तत्काल पुनर्वास” की व्यवस्था की जाए।
– “अवैध बुलडोजर कार्रवाई” पर तुरंत रोक लगाई जाए।
– पीड़ित परिवारों को हुए नुकसान की “तुरंत भरपाई और उचित मुआवजा” दिया जाए।

मई दिवस की अगली सुबह मजदूरों के घरों पर बुलडोजर – यह महज एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, एक राजनीतिक संदेश है। भाजपा शासित केंद्र और राज्य सरकारों के दौर में बुलडोजर आज “गरीबी को मिटाने का नहीं, बल्कि गरीबों को ही मिटाने का हथियार” बनता जा रहा है।
वजीरपुर की गलियों में बिखरा मलबा उन हाथों की मेहनत की निशानी है, जिन्होंने यह शहर बनाया – और आज उन्हीं हाथों से उनकी छत छीन ली गई।

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