कोरबा/बालको नगर (पब्लिक फोरम)। अक्षय तृतीया का पर्व इस बार कोरबा के प्रशांति वृद्धा आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के लिए केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक यादगार मुलाकात बन गई। समाजसेवी संस्था “मानव सेवा मिशन” के सदस्य इस पावन अवसर पर आश्रम पहुँचे और वहाँ निवासरत बुजुर्गों से आत्मीय भेंट की – उनका हालचाल पूछा, उनके पास बैठे, और उन्हें एहसास दिलाया कि वे अकेले नहीं हैं।
राशन, तरबूज और मटके – गर्मी में राहत का संदेश
इस मुलाकात में सदस्यों ने बुजुर्गों को दैनिक उपयोग की राशन सामग्री, सूखा नाश्ता और तरबूज वितरित किए। भीषण गर्मी को देखते हुए शीतल जल की व्यवस्था के लिए मिट्टी के मटके भी भेंट किए गए। गर्मी की तपन में ठंडे पानी का यह इंतज़ाम बुजुर्गों के लिए सुविधा से कहीं बढ़कर था – यह एक संवेदनशील सोच का प्रमाण था।
वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों ने जब अपने बीच इन युवा चेहरों को देखा, तो उनकी आँखों में एक अलग ही चमक आ गई। उन्होंने संस्था के सदस्यों को आशीर्वाद दिया और निरंतर जनकल्याण के कार्यों के लिए हृदय से आभार जताया।
छठवाँ स्थापना दिवस – सेवा का उत्सव
मानव सेवा मिशन इस महीने अपना “छठवाँ स्थापना दिवस” मना रही है और इस अवसर को सेवा के उत्सव में बदल दिया गया है। इससे पहले संस्था ने वनवासी कन्या छात्रावास में रहने वाली बच्चियों को शिक्षण सामग्री वितरित की और उन्हें न्यौता भोज भी कराया। इसके साथ ही भीषण गर्मी में बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए पानी के पात्र बाँटे जा रहे हैं – जीवमात्र के प्रति करुणा का यह भाव संस्था की पहचान बन चुकी है।
इस सेवा कार्य में संस्था के केशव चन्द्रा, राजेश धीवर, दिनेश पृथ्वीकर, तरुण राठौर, लिलेश्वर शर्मा, राम सहाय पटेल, संजू धुर्वे, राजेन्द्र देवांगन, सोहित, माधुरी चन्द्रा, अल्का पृथ्वीकर, स्मिता पटेल, प्रतिभा देवांगन तथा संस्था के कई छोटे-छोटे बच्चे भी उपस्थित रहे।
“एक पल के लिए जरा सोचिए – जब कोई बुजुर्ग वृद्धाश्रम की दीवारों के बीच दिन गिन रहा हो, और अचानक कोई उसका हाथ थाम ले, तो उस स्पर्श की कीमत राशन, तरबूज या मटके से कहीं बहुत ज़्यादा होती है। मानव सेवा मिशन शायद यही समझती है – कि सेवा का असली अर्थ सिर्फ़ सामान देना नहीं, बल्कि “साथ देना” भी है, बुजुर्गों का, मानवता का।”





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