कोरबा के बालको नगर में शहीद चंद्रशेखर आजाद चौक की प्रतिमा अतिक्रमण और गंदगी में घिरी है। बार-बार शिकायत के बावजूद प्रशासन निष्क्रिय। अधिवक्ता अब्दुल नफीस खान 24 अप्रैल को एक दिवसीय शांतिपूर्ण अनशन करेंगे।
कोरबा (पब्लिक फोरम)। जिस महान क्रांतिकारी ने देश की आज़ादी के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा दी, आज उसी की प्रतिमा अतिक्रमण, गंदगी और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ चुकी है। परसा भांठा, बालको नगर (कोरबा) स्थित शहीद चंद्रशेखर आजाद चौक में स्थापित अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा आज बदहाली की तस्वीर बन चुकी है। बार-बार शिकायतें की गईं, निवेदन किए गए — परंतु कार्यवाही के नाम पर केवल शून्य मिला।
यह चौक प्रदेश के यशस्वी नेताओं की उपस्थिति में नामकरण किया गया था और शहीद की प्रतिमा बड़े गौरव के साथ स्थापित की गई थी। किंतु आज वही स्थान शराबियों का अड्डा बन चुका है और उसका उपयोग कूड़ेदान की तरह हो रहा है। यह केवल एक प्रतिमा की उपेक्षा नहीं है – यह उस शहीद के सम्मान का, हमारी सामूहिक संवेदनाओं का और इस शहर की गरिमा का प्रश्न है।
इस अपमान के विरुद्ध आवाज़ उठाते हुए बालको नगर के अधिवक्ता अब्दुल नफीस खान ने निर्णय लिया है कि वे “24 अप्रैल 2026” को प्रातः “9 बजे से सायं 6 बजे” तक शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय शांतिपूर्ण अनशन पर बैठेंगे। इस अनशन की विधिवत लिखित सूचना जिलाधीश एवं आयुक्त, कोरबा को दे दी गई है।
अधिवक्ता नफीस खान ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी राजनीतिक दल या विचारधारा से प्रेरित नहीं है। उन्होंने कहा कि यह हम सभी नागरिकों की साझा जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने जागरूक नागरिकों, युवाओं, माताओं-बहनों, बुजुर्गों और समाज के तमाम साथियों से विनम्र अपील की है कि वे इस शांतिपूर्ण पहल में नैतिक समर्थन एवं सहभागिता दें।
यह सवाल अब केवल एक चौक या एक प्रतिमा का नहीं रहा। सवाल यह है – क्या हम अपने शहीदों का सम्मान करने के काबिल हैं? क्या प्रशासन इस जागृत आवाज़ को सुनेगा?





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