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राख का सैलाब, एक जान की कीमत: कोरबा के HTPP झाबू राखड़ डैम फूटने से JCB ऑपरेटर की मौत; अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप

कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक हृदय कोरबा में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। हसदेव ताप विद्युत गृह (HTPP) के झाबू राखड़ डैम की दीवार अचानक ढह गई और राख का विशाल सैलाब बाहर बह निकला। इस भीषण हादसे की चपेट में आने से एक JCB ऑपरेटर की मौके पर ही मौत हो गई। हैरान करने वाली बात यह है कि हादसे के वक्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी – चीफ इंजीनियर, कार्यपालन अभियंता और सहायक अभियंता – सभी मौके पर निरीक्षण के लिए मौजूद थे। इसके बावजूद यह त्रासदी रोकी नहीं जा सकी। अब सवाल यह है कि जब अधिकारी खुद वहाँ थे, तो आखिर चूक कहाँ हुई?

जब राख का पहाड़ टूटा…
कोरबा जिले में स्थित हसदेव ताप विद्युत गृह (HTPP) का झाबू राखड़ डैम कोई एक दिन में नहीं टूटा। सूत्रों के अनुसार, डैम में पहले से रिसाव की स्थिति बनी हुई थी। ऐसे में चीफ इंजीनियर देवनाथ, कार्यपालन अभियंता (ईई) चंचल ध्रुव और सहायक अभियंता (एई) चंद्रहास साहू स्थल का निरीक्षण करने पहुँचे थे।

निरीक्षण जारी था, काम भी जारी था – और इसी दौरान डैम की दीवार एकाएक ढह गई। राख का विशाल रेला उमड़ पड़ा। उस रेले में दब गया एक आम इंसान – एक JCB ऑपरेटर, जो शायद यह सोचकर वहाँ गया था कि आज भी काम होगा, शाम को घर लौटेगा। लेकिन वह लौट नहीं सका।

लापरवाही के सवाल – जब खतरा पता था, फिर भी…

यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक प्रणालीगत लापरवाही का नतीजा है। स्थानीय लोगों और सूत्रों की मानें तो:

– डैम में पहले से रिसाव था – यह स्थिति अधिकारियों को ज्ञात थी।
– रिसाव के बावजूद काम बंद नहीं किया गया – मजदूर और मशीनें डैम के पास काम करते रहे।
– क्षेत्र को समय रहते खाली नहीं कराया गया – अगर खतरे का पूर्व अनुमान था, तो मजदूरों को वहाँ से हटाया क्यों नहीं गया?
– वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे – फिर भी सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकामी रही।

यही सवाल अब गुस्से में तब्दील हो रहे हैं – उस परिवार के लिए, जिसने अपना कमाने वाला खो दिया।

आक्रोश में डूबा इलाका, न्याय की माँग
हादसे की खबर फैलते ही क्षेत्र में गुस्से की लहर दौड़ गई। स्थानीय नागरिकों, मजदूर संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से कई माँगें रखी हैं:

– निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जाँच – हादसे की जड़ तक पहुँचने की माँग।
– जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई – केवल निलंबन नहीं, आपराधिक जिम्मेदारी तय करने की माँग।
– मृतक परिवार को उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी – ताकि परिवार टूट न जाए।
– राखड़ डैम की संरचनात्मक जाँच – HTPP के सभी राखड़ डैमों की सुरक्षा की समीक्षा हो।

पर्यावरण पर भी मंडराया खतरा
राखड़ डैम फूटने का असर सिर्फ एक जान तक सीमित नहीं है। राख का यह सैलाब आसपास की जमीन, जल स्रोतों और वायु को भी प्रभावित कर सकता है। कोयले की राख में भारी धातुएँ और जहरीले तत्व होते हैं, जो मिट्टी और भूजल में मिलकर दीर्घकालिक नुकसान पहुँचाते हैं। पर्यावरणविदों ने माँग की है कि तत्काल पर्यावरणीय आकलन किया जाए और प्रभावित क्षेत्र के निवासियों के स्वास्थ्य की भी जाँच हो।

प्रशासन का रुख और आगे की राह
प्रशासन की ओर से मामले की जाँच के संकेत तो दिए गए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। कोरबा जैसे औद्योगिक जिले में जहाँ बिजली उत्पादन के नाम पर पहले से ही प्रदूषण और औद्योगिक जोखिम झेलती आई जनता, यह हादसा उनके जख्मों पर नमक की तरह है।

एक मौत, अनगिनत सवाल
जो JCB ऑपरेटर आज नहीं रहा, वह किसी का पति था, किसी का बेटा, किसी का पिता। उसका घर रोज की उम्मीद पर चलता था। वह सुबह निकला था – काम करने, जीवन चलाने। राख के उस सैलाब ने न सिर्फ एक इंसान को निगला, बल्कि एक पूरे परिवार के सपनों को भी दफन कर दिया।
सवाल यह है कि क्या उसकी यह कुर्बानी सिर्फ एक FIR और जाँच आदेश तक सिमट जाएगी? या फिर इस बार सच में कोई जवाबदेही तय होगी?
जनता की नजरें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं।

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