कोरबा/गेवरा (पब्लिक फोरम)। एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम नरईबोध और मनगांव के विस्थापित व प्रभावित ग्रामीणों का सब्र अब टूट चुका है। प्रबंधन द्वारा लिखित आश्वासन देने के बावजूद मांगें पूरी नहीं किए जाने से आक्रोशित ग्रामीणों ने 27 फरवरी 2026 से गेवरा खदान तथा पी.एन.सी. कंपनी के समस्त कार्यों को अनिश्चितकालीन बंद करने का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों ने इसे अन्याय के खिलाफ “आर-पार की लड़ाई” करार दिया है।
क्या है पूरा मामला
ग्रामीणों का आरोप है कि पी.एन.सी. कंपनी के कर्मचारियों द्वारा बिना पूर्व सूचना उनके पूर्वजों के मठों और धार्मिक स्थलों को खुदाई के दौरान नष्ट कर दिया गया, जिससे उनकी धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण के बदले वैकल्पिक रोजगार और उचित मुआवजा देने की मांग लंबे समय से लंबित है।
प्रबंधन ने तोड़ा लिखित वादा
उल्लेखनीय है कि 10 फरवरी को ग्रामीणों ने खदान बंद करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद 9 फरवरी को गेवरा प्रबंधन, पी.एन.सी. कंपनी और ग्रामीणों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई थी। बैठक में प्रबंधन ने लिखित रूप से आश्वासन दिया था कि एक सप्ताह के भीतर पात्र ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा और क्षतिग्रस्त मठों के मुआवजे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि लिखित आश्वासन के दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह न केवल ग्रामीणों के साथ धोखा है, बल्कि प्रबंधन की उदासीन और तानाशाही मानसिकता को भी उजागर करता है।
27 फरवरी से खदानबंदी का ऐलान
प्रबंधन के रवैये से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों ने अब खदानबंदी आंदोलन का निर्णय लिया है। इस संबंध में जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर सूचित कर दिया गया है कि यदि शीघ्र मांगें पूरी नहीं की गईं, तो 27 फरवरी से गेवरा खदान में उत्पादन और परिवहन पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा। इसके लिए संपूर्ण जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
1. वैकल्पिक रोजगार: पूर्व समझौते के अनुसार स्थानीय युवाओं को तत्काल रोजगार प्रदान किया जाए।
2. मुआवजा: क्षतिग्रस्त मठों और धार्मिक स्थलों का उचित मुआवजा, किराया-भाड़ा सहित तुरंत दिया जाए।
3. स्वास्थ्य सुरक्षा: क्षेत्र में उड़ रही धूल-डस्ट से फैल रही गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। यदि उनकी मांगों की अनदेखी जारी रही, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे गेवरा क्षेत्र का कोयला उत्पादन पूरी तरह प्रभावित होने की संभावना है।





Recent Comments