कोरबा (पब्लिक फोरम)। मनरेगा बचाओ अभियान के तहत मंगलवार को कोसाबाड़ी चौक पर बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकत्र हुए। मंच से नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला और नारेबाजी करते हुए कलेक्टर कार्यालय घेराव के लिए रैली निकाली।
रैली जैसे ही कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़ी, प्रशासन ने पहले से भारी पुलिस बल तैनात कर बेरिकेडिंग कर दी थी। प्रदर्शनकारियों ने पहला बेरिकेड हटाया, लेकिन कुछ दूरी पर दूसरे बेरिकेड पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद मौके पर सभा का आयोजन कर केंद्र सरकार के निर्णयों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर “वीबीजी रामजी” किए जाने और इसके नियमों में बदलाव करने का फैसला श्रमिकों के अधिकारों पर सीधा हमला है। इसे लेकर देशभर में कांग्रेस द्वारा “मनरेगा बचाओ अभियान” चलाया जा रहा है, जिसके तहत कोरबा जिला शहर एवं ग्रामीण कांग्रेस कमेटी ने यह प्रदर्शन किया।

सभा को संबोधित करते हुए सांसद ज्योत्सना महंत ने कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को ही समाप्त करने का काम किया है। पहले यह योजना संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़े अधिकार आधारित कानून के रूप में थी, लेकिन अब इसे केंद्र सरकार के नियंत्रण वाली योजना में बदल दिया गया है। यह बदलाव श्रमिकों से काम का अधिकार छीनने जैसा है।
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि सुधार के नाम पर एक नया बिल पास कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को कमजोर किया गया है। उन्होंने इसे महात्मा गांधी की सोच के खिलाफ और गरीब मजदूरों के अधिकारों को खत्म करने की साजिश बताया।

कोरबा प्रभारी विजय केशरवानी ने कहा कि मनरेगा पिछले दो दशकों से 12 करोड़ से अधिक मजदूरों की जीवनरेखा रही है। कोविड महामारी के समय भी इस योजना ने ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा दी। अब नए ढांचे के तहत इसे शर्तों पर आधारित और केंद्र नियंत्रित योजना बना दिया गया है, जिससे इसकी मूल भावना समाप्त हो जाएगी।
विधायक फूलसिंह राठिया ने कहा कि मनरेगा देश के सबसे गरीब वर्ग के लिए रोजगार की गारंटी थी, लेकिन अब नाम और नियम दोनों बदलकर इसे पूरी तरह केंद्र सरकार की इच्छा पर निर्भर कर दिया गया है। इससे रोजगार का संवैधानिक अधिकार समाप्त हो जाएगा।
पूर्व विधायक मोहित केरकेट्टा ने कहा कि “वीबीजी रामजी” नाम में भगवान राम का कोई संबंध नहीं है। इसका पूर्ण रूप “विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण” है, जिसे धार्मिक नाम देकर भ्रम फैलाया जा रहा है।
पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर ने याद दिलाया कि मनरेगा अधिनियम वर्ष 2005 में लागू हुआ था और यह प्रत्येक ग्रामीण नागरिक को मजदूरी का वैधानिक अधिकार देता था। अब नियमों में बदलाव कर उस अधिकार को समाप्त किया जा रहा है।
सभा को पूर्व विधायक श्यामलाल कंवर, पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद, महिला कांग्रेस अध्यक्ष कुसुम द्विवेदी, कटघोरा नगर पालिका अध्यक्ष राज जायसवाल सहित अनेक नेताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन जिला अध्यक्ष मुकेश राठौर ने किया और आभार ग्रामीण अध्यक्ष मनोज चौहान ने व्यक्त किया।
इस मौके पर बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने मनरेगा से जुड़े फैसले वापस नहीं लिए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण मजदूरों के सम्मान और जीवन सुरक्षा का आधार है। इसे कमजोर करना देश के गरीब और श्रमिक वर्ग के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।





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