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ओडिशा में वेदांता का एक लाख करोड़ रुपए का दांव – एल्युमीनियम साम्राज्य की नींव रखने की तैयारी

वेदांता की मेगा परियोजनाओं पर सरकार की नजर, हर 15 दिन में होगी समीक्षा

वेदांता और ओडिशा सरकार की साझेदारी – रायगड़ा से ढेंकानाल तक – वेदांता के निवेश से बदलेगी ओडिशा की तस्वीर?

भुवनेश्वर (पब्लिक फोरम)। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बीच लोक सेवा भवन में हुई बैठक में राज्य में एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की प्रस्तावित परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं की निगरानी अब हर पंद्रह दिन में की जाएगी।

बैठक में क्या हुआ?
राज्य के उद्योग, राजस्व और मुख्यमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में यह बैठक मुख्यतः परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर केंद्रित रही। अतिरिक्त मुख्य सचिव हेमन्त शर्मा, सास्वत मिश्रा, अरबिंद पाधी और वेदांता के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री माझी ने बैठक में कहा-

“ये परियोजनाएँ वर्ष 2036 तक ओडिशा को 500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की हमारी यात्रा को तेज़ करेंगी। इससे खासकर मध्य और दक्षिण ओडिशा में आर्थिक गतिविधियों और बुनियादी ढांचे के विकास को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।”

किन परियोजनाओं पर हुई चर्चा?
वेदांता ग्रुप ओडिशा में निम्नलिखित परियोजनाएँ स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है-

– रायगड़ा जिले में 60 लाख टन क्षमता की एल्युमिना (alumina) रिफाइनरी
– ढेंकानाल जिले में 30 लाख टन क्षमता का एल्युमीनियम स्मेल्टर (smelter – धातु गलाने का संयंत्र)
– ढेंकानाल में ही 6,000 मेगावाट क्षमता की पावर परियोजना
– एकीकृत कोयला और बॉक्साइट उद्योग, साथ में डाउनस्ट्रीम एल्युमीनियम पार्क

इस एल्युमीनियम पार्क में एयरोस्पेस, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और रक्षा क्षेत्र के लिए उन्नत उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।

ज़मीन और बुनियादी ढांचा – कहाँ तक पहुँची तैयारी?
सरकार के अनुसार ढेंकानाल में पावर परियोजना और स्मेल्टर के लिए तथा रायगड़ा में एल्युमिना रिफाइनरी के लिए भूमि आवंटन पूरा किया जा चुका है। आवश्यक बुनियादी ढांचे की व्यवस्था भी जारी है। कंपनी का नया कोयला ब्लॉक इसी वर्ष परिचालन शुरू करने के लक्ष्य पर है। रेल मंत्रालय ने प्रस्तावित बॉक्साइट खदान के पास एक नई रेल लाइन को भी मंजूरी दे दी है।

अनिल अग्रवाल का बयान

वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा-
“ये परियोजनाएँ ओडिशा की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएँगी – लाखों रोजगार पैदा होंगे, स्थानीय उद्यमों को मजबूती मिलेगी और एक भविष्य के लिए तैयार औद्योगिक केंद्र विकसित होगा।”
उन्होंने राज्य सरकार के सहयोग के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

ज़मीनी सवाल – जिन पर जवाब बाकी है

यह निवेश निश्चित रूप से ओडिशा के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखता है। लेकिन रायगड़ा और ढेंकानाल जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जब भी बड़ी औद्योगिक परियोजनाएँ आती हैं, तो ज़मीन विस्थापन, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय समुदायों की हिस्सेदारी जैसे सवाल भी साथ आते हैं।
रायगड़ा जिले में एल्युमिना रिफाइनरी की ज़मीन पहले से आवंटित हो चुकी है – लेकिन इस प्रक्रिया में प्रभावित परिवारों को उचित मुआवज़ा और पुनर्वास मिला या नहीं, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

अब आगे क्या?
मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार अब हर पंद्रह दिन में परियोजनाओं की समीक्षा होगी। यदि सरकारी दावों के अनुरूप लाखों रोज़गार वास्तव में स्थानीय युवाओं तक पहुँचते हैं – विशेषकर मध्य और दक्षिण ओडिशा के आदिवासी और ग्रामीण युवाओं तक – तो यह निवेश सचमुच परिवर्तनकारी साबित हो सकता है। लेकिन अगर यह केवल कॉर्पोरेट विस्तार बनकर रह गया, तो ओडिशा के गांव की तस्वीर नहीं बदलेगी – सिर्फ उनकी ज़मीन बदल जाएगी।

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