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बालवाड़ी प्रशिक्षण: शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए तीन दिवसीय कार्यशाला

रायगढ़ (पब्लिक फोरम)। जिला समग्र शिक्षा रायगढ़ के मार्गदर्शन में, विकासखंड रायगढ़ में 125 बालवाड़ी केंद्रों के शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा देना, बिना किसी दबाव के पठन-पाठन करवाना, और उन्हें दो अक्षरों के शब्द बनाना तथा 1 से 9 तक की सीधी व उल्टी गिनती सिखाना है।

इस प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों को अपने दैनिक जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान स्वयं करने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, बच्चों को स्वस्थ रखने और स्वस्थ मस्तिष्क के विकास के महत्व पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस कार्यशाला का एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य यह है कि बालवाड़ी के बच्चों को स्कूल जाने से पहले किस प्रकार से तैयार किया जाए, ताकि वे स्कूल के वातावरण में आसानी से समायोजित हो सकें।

राज्य स्तर से प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स इस कार्यशाला में विभिन्न केंद्रों से आए शिक्षकों और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को गीत, कहानी, अभिनय और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सीखने के तरीके बताए जा रहे हैं। द्वितीय दिवस के दौरान, विकासखंड स्रोत केंद्र के मनोज अग्रवाल ने विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों का दौरा कर प्रशिक्षण संचालन का निरीक्षण किया और भविष्य में नई शिक्षा नीति के तहत किए जाने वाले कार्यों की रूपरेखा से प्रशिक्षणार्थियों को अवगत कराया।

संकुल समन्वयक राजकमल पटेल ने भी उपस्थित प्रशिक्षार्थियों को संबोधित करते हुए, उन्हें प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने और केंद्र में जाकर प्राप्त प्रशिक्षण अनुसार गतिविधि आधारित शिक्षण करने का आह्वान किया। इस प्रशिक्षण के संचालन में संकुल समन्वयक विनोद कुमार सिंह, मनोज कुमार गुप्ता, चेतन कुमार चौधरी, जानेश्वर खरे, विकास पटेल, खगेश्वर साहू, सुशील कुमार चौहान के साथ-साथ मास्टर ट्रेनर्स सुश्री सुशीला साहू, शकुंतला सहश, सजीत पंडा, लता महंत, शिव कुमारी कंवर, नित्यानंद डनसेना, जानकी पटेल, वीरेंद्र चौहान आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बालवाड़ी केंद्रों में अध्ययनरत बच्चों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा और सीखने का वातावरण प्राप्त हो सके, जिससे उनके समग्र विकास में सहायता मिलेगी। 

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