जांच पूरी न होने पर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग तेज
कोरबा/सक्ती (पब्लिक फोरम)। सक्ती जिले के सिंघितराई स्थित वेदांता पावर लिमिटेड में 14 अप्रैल 2026 को हुई औद्योगिक दुर्घटना की जांच को लेकर नए सवाल सामने आए हैं। इंटक के जिला सचिव एवं ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस के सदस्य संजय कुमार पटेल ने आरोप लगाया है कि शासन द्वारा 30 दिनों की समय-सीमा निर्धारित किए जाने के बावजूद जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने जांच में हुई देरी के कारणों को सार्वजनिक करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
14 अप्रैल को हुई थी गंभीर औद्योगिक दुर्घटना
विज्ञप्ति के अनुसार, 14 अप्रैल 2026 को वेदांता पावर लिमिटेड, सिंघितराई (तहसील डभरा, जिला सक्ती) में बॉयलर के स्टीम पाइप की वाटर सप्लाई लाइन के ज्वाइंट में तकनीकी खराबी के कारण गंभीर औद्योगिक दुर्घटना हुई थी। इस हादसे में कई श्रमिक प्रभावित हुए थे तथा कुछ श्रमिकों की मृत्यु भी हुई थी।
दुर्घटना के बाद छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने 17 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के माध्यम से बिलासपुर संभाग के संभागायुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया था।
शासन ने 30 दिनों में जांच पूरी करने का दिया था निर्देश
शासनादेश में जांच के लिए तीन प्रमुख बिंदु निर्धारित किए गए थे—दुर्घटना कब और कैसे हुई, उसके कारण क्या थे तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या सुझाव दिए जा सकते हैं। साथ ही जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन राज्य शासन को प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया था।
इंटक ने उठाए कई सवाल
संजय कुमार पटेल का कहना है कि निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी जांच पूरी नहीं हुई है। उनका दावा है कि संभागायुक्त कार्यालय से प्राप्त सूचना में जांच प्रक्रिया को अभी भी प्रगति पर बताया गया है और रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है।
उन्होंने कई प्रश्न उठाए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से यह शामिल है कि यदि जांच निर्धारित समय में पूरी नहीं हो सकी तो क्या समय-सीमा बढ़ाने का कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया था। यदि ऐसा आदेश जारी हुआ है तो उसकी प्रति सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि जांच में देरी के वास्तविक कारण क्या हैं और क्या शासन से समय-वृद्धि की अनुमति ली गई थी।
पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
विज्ञप्ति में कहा गया है कि इतने गंभीर औद्योगिक हादसे की जांच रिपोर्ट का लंबे समय तक सार्वजनिक न होना सार्वजनिक हित का विषय है। इसमें आशंका भी व्यक्त की गई है कि जांच में हो रही देरी को लेकर विभिन्न तरह के सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इंटक ने राज्य शासन और संभागायुक्त से मांग की है कि जांच में हुई देरी के कारण सार्वजनिक किए जाएं, यदि समय-सीमा बढ़ाई गई है तो संबंधित आदेश उपलब्ध कराया जाए, जांच रिपोर्ट शीघ्र पूरी कर सार्वजनिक की जाए तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
श्रमिक सुरक्षा से जुड़ा व्यापक मुद्दा
औद्योगिक दुर्घटनाओं की जांच केवल किसी एक घटना की जिम्मेदारी तय करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि इससे भविष्य में सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और श्रमिकों के जीवन की रक्षा के उपाय भी तय होते हैं। ऐसे मामलों में समयबद्ध और पारदर्शी जांच प्रभावित परिवारों के विश्वास को बनाए रखने के साथ-साथ औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वेदांता पावर दुर्घटना की जांच में देरी को लेकर उठे प्रश्न अब प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता के मुद्दे के रूप में सामने आ रहे हैं। यदि जांच निर्धारित समय से आगे बढ़ी है, तो उसके कारणों और कानूनी आधार को सार्वजनिक करना शासन के लिए विश्वास बनाए रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।





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