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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अब नया नियम, सुबह सरस्वती वंदना और छुट्टी पर होगा गायत्री मंत्र पाठ

रायपुर (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अब विद्यार्थियों की दैनिक दिनचर्या और प्रार्थना सभा के स्वरूप में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी शासकीय विद्यालयों में प्रार्थना और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक नई व्यवस्था लागू की है। इस नए आदेश के तहत स्कूलों की शुरुआत से लेकर छुट्टी होने तक विभिन्न मंत्रों, राष्ट्रगान और प्रेरक वचनों का पाठ अनिवार्य कर दिया गया है, जिसका सीधा असर प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी इस नए आदेश के बाद अब प्रदेश के सभी प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में एक तय शेड्यूल के मुताबिक ही सांस्कृतिक और धार्मिक-नैतिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं और इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा है।

नए नियम और दैनिक समय-सारणी
विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, स्कूलों में प्रार्थना और अन्य गतिविधियों को तीन हिस्सों में बांटा गया है:
🔹 स्कूल की शुरुआत (सुबह): प्रतिदिन स्कूल लगने के समय सुबह की सभा में सबसे पहले राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का गायन होगा। इसके बाद दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र का पाठ किया जाएगा। साथ ही, विद्यार्थियों को नैतिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए महापुरुषों के प्रेरक जीवन वचनों का पाठ भी कराया जाएगा।
🔹 मध्यान्ह भोजन के समय (दोपहर): मिड-डे मील (मध्यान्ह भोजन) शुरू होने से ठीक पहले सभी विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक रूप से भोजन मंत्र का पाठ किया जाएगा।
🔹स्कूल की छुट्टी के समय (शाम): विद्यालय की समय-सारणी समाप्त होने पर विसर्जन के वक्त छत्तीसगढ़ का राजगीत (अरपा पैरी के धार), गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का सामूहिक पाठ किया जाएगा।

विभाग का उद्देश्य और तर्क
स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से विद्यार्थियों के भीतर न केवल नैतिक मूल्यों और अनुशासन का विकास होगा, बल्कि वे भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति भी जागरूक होंगे।
“प्रार्थना सभा और छुट्टी के समय इन मंत्रों व राजगीत के सामूहिक पाठ से बच्चों में सकारात्मक सोच, अच्छे संस्कार और सामूर्हिक भावना (टीम स्पिरिट) को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्कूलों का माहौल अधिक अनुशासित और ऊर्जावान बनेगा।” – स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़

प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव का आकलन
प्रशासनिक दृष्टिकोण से इस आदेश को लागू कराना जिला शिक्षा अधिकारियों के लिए एक नई जिम्मेदारी होगी। हर स्कूल में समय-सारणी के पालन और मंत्रों के सही उच्चारण को सुनिश्चित करना शिक्षकों के लिए शुरुआती दिनों में थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सामाजिक स्तर पर इस फैसले के मिले-जुले प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। एक तरफ जहां पारंपरिक मूल्यों और धर्म-संस्कृति से जुड़ाव की सराहना करने वाले अभिभावक इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, वहीं शिक्षाविदों का एक वर्ग यह भी मान रहा है कि सरकारी स्कूलों में मुख्य ध्यान बुनियादी शिक्षा के स्तर को सुधारने, शिक्षकों की कमी को दूर करने और शिक्षा की बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर होना चाहिए, न कि मंत्रोच्चारण और मंत्र-पाठ।

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