कोरबा (पब्लिक फोरम)। कोरबा में ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी विवादों का अदालत के बाहर शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा “सामुदायिक मध्यस्थता मुकदमा मुक्त ग्रामीण भारत” अभियान के तहत पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य सामुदायिक मध्यस्थों को विवादों के वैकल्पिक समाधान की प्रभावी प्रक्रिया से प्रशिक्षित करना है, ताकि छोटे-छोटे विवाद न्यायालयों तक पहुंचने से पहले ही सुलझाए जा सकें।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नई दिल्ली) तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा द्वारा “सामुदायिक मध्यस्थता मुकदमा मुक्त ग्रामीण भारत” अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह प्रशिक्षण 19 जुलाई से 23 जुलाई 2026 तक एडीआर भवन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा में आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री संतोष शर्मा ने किया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में संवाद, सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से विवादों के समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कोरबा और कटघोरा न्यायालयों के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, न्यायिक मजिस्ट्रेट, श्रम न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सहित अनेक न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा, बिलासपुर उच्च न्यायालय से पोटेंशियल ट्रेनर्स के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीमती हदीमा सिद्दकी और अधिवक्ता सुश्री आकांक्षा जैन ने विशेषज्ञ प्रशिक्षक के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम में कोरबा एवं जांजगीर-चांपा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से आए सामुदायिक मध्यस्थ, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के अधिवक्ता तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल हुए।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस में विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा, उसके उद्देश्य, कार्यप्रणाली तथा ग्रामीण स्तर पर विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की प्रक्रिया से अवगत कराया। प्रशिक्षण का उद्देश्य ऐसे मध्यस्थ तैयार करना है, जो स्थानीय स्तर पर पारिवारिक, सामाजिक और सामुदायिक विवादों को संवाद और सहमति के आधार पर सुलझाने में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार, यह पहल न्यायालयों पर अनावश्यक मुकदमों का बोझ कम करने के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों को त्वरित, सुलभ और कम खर्चीला विवाद समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से आपसी विश्वास और सामाजिक सौहार्द को भी बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।





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