बालको-परसाभांठा फोरलेन सड़क निर्माण का विरोध. छोटे दुकानदारों को उजाड़कर न हो विकास. प्रशासन से सड़क डिजाइन के पुनरीक्षण की मांग
कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित बालकोनगर के परसाभाठा मार्ग पर प्रस्तावित फोरलेन सड़क निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने गुरुवार को परसाभाठा बाजार चौक का दौरा कर प्रभावित स्थानीय निवासियों और छोटे दुकानदारों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास के नाम पर वर्षों से जीवनयापन कर रहे गरीब दुकानदारों की रोजी-रोटी छीनना स्वीकार्य नहीं होगा।
स्थल निरीक्षण के दौरान पूर्व मंत्री ने स्थानीय प्रशासन और वेदांता-बालको प्रबंधन से सड़क के नक्शे एवं भूमि सीमा का पुनरीक्षण करने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि फोरलेन या सिक्सलेन सड़क के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है, तो वेदांता प्रबंधन को अपनी बाउंड्री वॉल (सीमा दीवार) पीछे खिसकाकर स्थान उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि किसी गरीब की दुकान न उजड़े।
दुकानदारों के समर्थन में पूर्व मंत्री का वक्तव्य
परसाभाठा क्षेत्र में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा, “सड़क बनाइए, विकास कीजिए, फोरलेन बनाइए, जरूरत हो तो सिक्सलेन भी बनाइए, लेकिन उन गरीब दुकानदारों को उजाड़कर नहीं, जिनकी छोटी-सी दुकान ही उनके परिवार की रोजी-रोटी का एकमात्र सहारा है।”
उन्होंने कहा कि परसाभाठा चौक के कई दुकानदार दशकों से अपनी छोटी दुकानों के जरिए परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। इन दुकानों को हटाने का सीधा अर्थ एक पूरे परिवार के आय के साधन को समाप्त करना है। इसलिए सड़क निर्माण की योजना बनाते समय प्रभावित परिवारों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

वेदांता प्रबंधन पर आरोप और बाउंड्री वॉल खिसकाने का सुझाव
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि वेदांता-बालको प्रबंधन संयंत्र विस्तार और एश डाइक (राख बांध) निर्माण में शासकीय भूमि का उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के लिए यदि कुछ मीटर अतिरिक्त जमीन की जरूरत है, तो कंपनी को संयंत्र की ओर अपनी बाउंड्री वॉल पीछे खिसका लेनी चाहिए। इससे सड़क निर्माण भी पूरा हो सकेगा और दुकानदारों की आजीविका भी सुरक्षित रहेगी।
इसके साथ ही उन्होंने प्रबंधन से स्थानीय लोगों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की मांग की। अग्रवाल ने कहा कि उद्योग की सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार, कर्मचारियों को सुविधाएं, कार्यस्थल पर सुरक्षा और प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा करना भी उद्योग का दायित्व है।
प्रशासन से पुनर्विचार की अपील
पूर्व मंत्री ने स्थानीय प्रशासन से आग्रह किया कि वह प्रभावित निवासियों की आपत्तियों और सुझावों को गंभीरता से सुने। उन्होंने प्रशासन को सलाह दी कि वेदांता प्रबंधन के साथ समन्वय बनाकर सड़क की डिजाइन का पुनः परीक्षण किया जाए और कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।

विभिन्न संगठनों का मिला समर्थन
दौरे के दौरान जनप्रतिनिधि, व्यापारी संघ और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इनमें कोरबा जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश कुमार राठौर, बालकोनगर चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सुमेर डालमिया, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ अध्यक्ष गजानंद साहू, कोरबा निगम नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, पार्षद रामगोपाल कुर्रे, बद्री किरण, रवि चंदेल, ब्लॉक अध्यक्ष ए.डी. जोशी, पालूराम साहू, मंडल अध्यक्ष देवीदयाल सोनी, बुधेश्वर चौहान और इकबाल कुरैशी शामिल थे।
इसके अलावा श्रमिक नेता संजू शर्मा, एफ.डी. मानिकपुरी, राकेश पंकज, मुन्ना खान, पुष्पा पात्रे, निकिता खलखो और राजा यादव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी और छोटे दुकानदार उपस्थित थे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह मामला औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और स्थानीय असंगठित क्षेत्र के कारोबारियों के अधिकारों के बीच संतुलन से जुड़ा है। कोरबा जैसे औद्योगिक क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण की परियोजनाओं का सीधा असर छोटे स्ट्रीट वेंडरों और स्थानीय निवासियों की आजीविका पर पड़ता है। यह विवाद सार्वजनिक विकास योजनाओं में पारदर्शी भूमि उपयोग, स्थानीय जनसंवाद और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व की भूमिका को रेखांकित करता है।
पूर्व मंत्री द्वारा उठाए गए मुद्दों और स्थानीय निवासियों की आपत्तियों के बाद अब प्रशासनिक रुख पर सभी की निगाहें हैं। प्रभावित निवासियों की मांग है कि जिला प्रशासन वेदांता प्रबंधन के साथ मिलकर फोरलेन सड़क निर्माण हेतु भूमि सीमा का पुनः सर्वेक्षण करे और सड़क की डिजाइन में आवश्यक संशोधन करे। इस संबंध में स्थानीय प्रशासन और वेदांता-बालको प्रबंधन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।






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