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छत्तीसगढ़ में ‘वोट चोरी’ का आरोप: राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को घेरा

तकनीकी खामी और मतदाता सूची में गड़बड़ी का दावा, पारदर्शी जांच की मांग
2023 चुनाव नतीजों का संदर्भ देकर ईवीएम और मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल

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नई दिल्ली/रायपुर (पब्लिक फोरम)
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ समेत आधा दर्जन राज्यों के चुनावों में ‘वोट चोरी’ का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए चुनावी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और स्वतंत्र जांच की मांग की है।

राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके तकनीकी विशेषज्ञों ने चुनाव आयोग की एक बड़ी प्रक्रियात्मक चूक पकड़ी है, जिससे चुनावी नतीजों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगता है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में ज्ञानेश कुमार के नाम का उन्होंने नियुक्ति समिति में विरोध किया था, लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी आपत्तियों को दरकिनार कर दिया।
छत्तीसगढ़ के अलावा राहुल गांधी ने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के हालिया चुनावों में भी प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का जिक्र किया।

छत्तीसगढ़ चुनाव 2023 का गणित और उठते सवाल
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 के आंकड़ों पर नजर डालें तो 90 सदस्यीय विधानसभा में राजनीतिक संतुलन इस प्रकार रहा था:
🔹 भारतीय जनता पार्टी (BJP): 54 सीटें (लगभग 46.27% मत प्रतिशत)
🔹भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC): 35 सीटें (लगभग 42.23% मत प्रतिशत)
🔹गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP): 01 सीट
कांग्रेस और भाजपा के बीच मत प्रतिशत का अंतर मात्र 4.04% का था। राहुल गांधी का तर्क है कि यदि मतदाता सूची या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्तर पर मामूली गड़बड़ी भी होती है, तो वह जनादेश के रुख को बदल सकती है।

आम नागरिक, मजदूर और आदिवासी अधिकारों पर प्रभाव
एक निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया का सीधा संबंध आम नागरिक, खदानों व कारखानों में काम करने वाले असंगठित मजदूरों और बस्तर-सरगुजा जैसे जनजातीय अंचलों के निवासियों के जीवन से जुड़ा होता है। लोकतंत्र में यदि मतदान की पवित्रता पर संशय उत्पन्न होता है, तो उसका सीधा असर सरकार द्वारा बनाए जाने वाले श्रम कानूनों, जल-जंगल-जमीन से जुड़ी नीतियों और औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर पड़ता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकतंत्र की बुनियादी नींव पर बल देते हुए राहुल गांधी ने कहा:
“यदि चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो इसका असर केवल मतदान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे बनने वाली सरकार और कानून बनाने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं।”

मतदाता सूची और युवाओं की चुनौतियां
राहुल गांधी ने मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि नए और युवा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने में अनावश्यक तकनीकी व प्रशासनिक बाधाएं आ रही हैं। विपक्ष अब एकजुट होकर इस मुद्दे को सार्वजनिक मंचों और संसद में उठाने की योजना बना रहा है।

चुनावी पारदर्शिता की यह मांग केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिक के उस भरोसे से जुड़ी है जो वह पोलिंग बूथ पर जाकर बटन दबाते समय रखता है। यदि चुनाव आयोग को कार्यपालिका के प्रभाव से पूरी तरह स्वतंत्र और जवाबदेह नहीं बनाया गया, तो आम मजदूर, किसान और युवा का लोकतंत्र में विश्वास कमजोर पड़ सकता है। आने वाले समय में मतदाता सूचियों के निष्पक्ष पुनरीक्षण और चुनावी जांच की यह मांग जन-आंदोलन का रूप ले सकती है।

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