14 अगस्त से सड़क की बिजली और 17 अगस्त से यूनियन कार्यालय, स्कूल की बिजली-पानी आपूर्ति बंद; अल्युमिनियम कामगार संघ ने तत्काल बहाली की मांग की
कोरबा/बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) के वेदांता प्रबंधन द्वारा बालको टाउनशिप में बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति बंद किए जाने को लेकर श्रमिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों के बीच चिंता बढ़ गई है। अल्युमिनियम कामगार संघ (ऐक्टू) ने आरोप लगाया है कि टाउनशिप के बस स्टैंड से मिनीमाता चौक तक सड़क की बिजली आपूर्ति 14 अगस्त 2026 से बंद कर दी गई है। इसके बाद 17 अगस्त 2026 से उसी क्षेत्र में स्थित यूनियन कार्यालय तथा स्कूल की बिजली और पानी की आपूर्ति भी बंद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अल्युमिनियम कामगार संघ ने इसे केवल किसी कार्यालय अथवा संस्था की सुविधा का मामला न मानते हुए टाउनशिप में रहने वाले श्रमिक परिवारों, बच्चों, स्थानीय नागरिकों और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं का प्रश्न बताया है। संगठन ने वेदांता प्रबंधन से मांग की है कि बिजली-पानी तथा अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं को तत्काल बहाल किया जाए और भविष्य में ऐसी किसी कार्रवाई से पहले संबंधित हितधारकों को विधिवत सूचना देकर बातचीत की जाए।
एमओयू और अन्य दस्तावेजों की शर्तों की हो जांच
श्रमिक संगठन का कहना है कि बालको टाउनशिप में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के संबंध में प्रबंधन और संबंधित संस्थाओं के बीच यदि कोई एमओयू, लीज, लाइसेंस, रेंटल एग्रीमेंट, सेवा-समझौता अथवा अन्य लिखित व्यवस्था प्रभावी है, तो उसकी शर्तों के अनुरूप प्रबंधन की जिम्मेदारियों की स्पष्ट समीक्षा की जानी चाहिए।
विशेष रूप से यह देखा जाना आवश्यक है कि बिजली, पानी, सड़क प्रकाश, स्कूल अथवा अन्य सुविधाओं को उपलब्ध कराने और उनके रखरखाव के संबंध में प्रबंधन ने कौन-सी संविदात्मक या संस्थागत जिम्मेदारियां स्वीकार की हैं। यदि किसी समझौते में ऐसी सेवाओं को जारी रखने की जिम्मेदारी प्रबंधन पर निर्धारित है, तो उन्हें एकतरफा और अचानक बंद करने की कार्रवाई संविदात्मक विवाद का विषय बन सकती है।
इसलिए संगठन ने मांग की है कि संबंधित एमओयू एवं अन्य लागू दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं अथवा उनके संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वास्तविक दायित्वों की स्थिति स्पष्ट हो सके।
CSR को लेकर भी उठे सवाल
बालको स्वयं अपनी आधिकारिक CSR नीति और सामाजिक प्रभाव संबंधी सामग्री में जल एवं स्वच्छता, शिक्षा तथा सामुदायिक बुनियादी ढांचे को अपने सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल करता है। कंपनी ने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा है कि उसका CSR दृष्टिकोण स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास तथा सामुदायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित है।
वेदांता समूह की अपनी CSR सामग्री में भी सड़क, स्ट्रीट लाइट, बस स्टैंड, सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और सामुदायिक केंद्र जैसी सुविधाओं को CSR गतिविधियों के उदाहरणों में शामिल किया गया है।
हालांकि, श्रमिक संगठनों का यह भी मानना है कि CSR और किसी मौजूदा संविदात्मक अथवा सेवा संबंधी दायित्व को एक ही कानूनी श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 और अनुसूची VII CSR गतिविधियों का ढांचा निर्धारित करती हैं; इनमें सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा तथा सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं। लेकिन किसी विशेष सड़क, कार्यालय, स्कूल या टाउनशिप को बिजली-पानी उपलब्ध कराना कंपनी का अनिवार्य CSR दायित्व है – यह निष्कर्ष संबंधित एमओयू, समझौते और वास्तविक व्यवस्था देखे बिना नहीं निकाला जा सकता।
इसीलिए ऐक्टू का जोर इस बात पर है कि CSR के दावों के साथ-साथ प्रबंधन के वास्तविक व्यवहार और उसके घोषित सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच सामंजस्य भी दिखाई देना चाहिए।
‘CSR’ के नाम पर सुविधा देना और फिर अचानक बंद करना सवालों के घेरे में
बालको प्रबंधन ने हाल के वर्षों में सामुदायिक बुनियादी ढांचे से संबंधित कई परियोजनाओं में CSR योगदान की जानकारी सार्वजनिक की है। उदाहरण के लिए, मई 2026 में बालको ने अपने क्षेत्र के अंतर्गत शांतिनगर क्षेत्र में सड़क किनारे नाली निर्माण परियोजना में CSR निधि से 2.5 करोड़ रुपए के योगदान की जानकारी दी थी। जून 2026 में कंपनी ने सामुदायिक भवन तथा अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों के निर्माण का भी उल्लेख किया।
ऐसी स्थिति में श्रमिक संगठन का सवाल है कि जब कंपनी सामुदायिक विकास और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता का हिस्सा बताती है, तब टाउनशिप में पहले से उपलब्ध बिजली-पानी जैसी आवश्यक सुविधाओं को अचानक रोकने की नीति का आधार क्या है?
संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह प्रबंधन की CSR गतिविधियों का विरोध नहीं करता, बल्कि उसका आग्रह है कि सामुदायिक विकास की नीति में पारदर्शिता, निरंतरता, समानता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
बिना सूचना सुविधा बंद करना उचित प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है
अल्युमिनियम कामगार संघ के अनुसार, यदि प्रबंधन किसी सुविधा को बंद करना चाहता है तो संबंधित संस्थाओं, श्रमिक संगठनों और प्रभावित नागरिकों को पूर्व सूचना देकर कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए तथा जहां आवश्यक हो, वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
विशेष रूप से स्कूल में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित होने का सीधा प्रभाव बच्चों, शिक्षकों और कर्मचारियों पर पड़ सकता है। इसी प्रकार सड़क प्रकाश व्यवस्था बंद होने से रात के समय पैदल आवागमन, श्रमिकों की आवाजाही और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका रहती है।
संगठन का कहना है कि प्रशासनिक या प्रबंधकीय अधिकार का प्रयोग भी पारदर्शी, तर्कसंगत और गैर-भेदभावपूर्ण होना चाहिए। यदि किसी सुविधा के उपयोग, किराए, लाइसेंस या अनुबंध से संबंधित विवाद है, तो उसका समाधान विधिसम्मत प्रक्रिया और संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए, न कि आवश्यक सेवाओं को अचानक रोककर।
सभी संस्थाओं के साथ समान व्यवहार की मांग
ऐक्टू ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि टाउनशिप में अलग-अलग संस्थाओं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों अथवा अन्य उपयोगकर्ताओं को बिजली-पानी अथवा अन्य सुविधाएं किसी रेंटल, लाइसेंस अथवा सेवा व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराई जाती हैं, तो समान परिस्थितियों में सभी के साथ समान और गैर-भेदभावपूर्ण व्यवहार होना चाहिए।
हालांकि प्रत्येक संस्था की संविदात्मक स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए समानता के सिद्धांत का वास्तविक परीक्षण संबंधित समझौतों और शर्तों की तुलना के बाद ही किया जा सकता है। संगठन ने इसी कारण प्रबंधन से पारदर्शी नीति और स्पष्ट मानदंड सार्वजनिक करने की मांग की है।
ऐक्टू ने प्रबंधन को भेजा अनुरोध पत्र
अल्युमिनियम कामगार संघ (ऐक्टू) ने वेदांता प्रबंधन को लिखित अनुरोध पत्र भेजकर टाउनशिप के रहवासियों, श्रमिक परिवारों तथा संबंधित संस्थानों को बिजली, पानी और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं बिना भेदभाव और बिना किसी दुर्भावना के उपलब्ध कराने की मांग की है।
संगठन ने कहा है कि उसका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से समस्या का समाधान और टाउनशिप की बुनियादी सुविधाओं की निरंतरता सुनिश्चित करना है।
प्रबंधन से पांच प्रमुख मांगें
अल्युमिनियम कामगार संघ ने वेदांता प्रबंधन से मांग की है कि—
1. बस स्टैंड से मिनीमाता चौक तक सड़क प्रकाश की बिजली आपूर्ति तत्काल बहाल की जाए।
2. यूनियन कार्यालय और स्कूल की बिजली तथा पानी की आपूर्ति तत्काल बहाल की जाए।
3. सुविधाएं बंद करने के निर्णय का लिखित कारण और संबंधित आदेश/निर्णय सार्वजनिक किया जाए।
4. बिजली-पानी एवं अन्य टाउनशिप सुविधाओं से संबंधित एमओयू, लीज, लाइसेंस, रेंटल अथवा सेवा-समझौतों में निर्धारित जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जाए।
5. भविष्य में ऐसी आवश्यक सुविधाओं को बंद करने से पहले संबंधित श्रमिक संगठनों, संस्थाओं और प्रभावित पक्षों से पूर्व सूचना एवं संवाद की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
AICCTU ने संवाद का रास्ता खुला रखा
अल्युमिनियम कामगार संघ ने कहा है कि श्रमिक संगठन किसी भी वैध प्रशासनिक या प्रबंधकीय निर्णय के अधिकार से इनकार नहीं करता। लेकिन अधिकार के साथ जवाबदेही और प्रक्रिया का पालन भी आवश्यक है।
संगठन का कहना है कि यदि प्रबंधन को किसी संस्था द्वारा सुविधा के उपयोग, किराए, बकाया राशि, अनुबंध या अन्य किसी विषय पर आपत्ति है तो वह संबंधित पक्ष को लिखित रूप से सूचित करे और नियमानुसार समाधान की प्रक्रिया अपनाए। बिजली और पानी जैसी आवश्यक सुविधाओं को अचानक रोकना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
संगठन ने वेदांता प्रबंधन से आग्रह किया है कि वह तत्काल वार्ता के लिए आगे आए और टाउनशिप में सामान्य जनजीवन को प्रभावित करने वाली सुविधाओं को बिना किसी भेदभाव के बहाल करे।
अल्युमिनियम कामगार संघ (ऐक्टू) ने स्पष्ट किया है कि वह श्रमिकों, उनके परिवारों, बच्चों और टाउनशिप के नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े ऐसे मुद्दों को लोकतांत्रिक, संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाता रहेगा।





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