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चक्का जाम के बाद बालको में शांतिनगर प्रभावित परिवारों की कल 16 सितंबर को होगी बैठक

रोजगार और पुनर्वास की मांग पर 15 साल बाद समाधान की उम्मीद

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कोरबा/बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। शांतिनगर के प्रभावित परिवार पिछले करीब 15 वर्षों से रोजगार, उचित मुआवजा और पुनर्वास सहित अपने अधिकारों की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। मंगलवार को मांगों के समर्थन में चक्का जाम किए जाने के बाद प्रशासन और वेदांता प्रबंधन की ओर से बैठक का आश्वासन दिया गया। इसी क्रम में प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर चर्चा के लिए 16 सितंबर 2026 को महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।
शांतिनगर प्रभावित परिवारों के अनुसार, वे पिछले 15 वर्षों से रोजगार, उचित मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से मांगें उठाए जाने के बावजूद अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को प्रभावित परिवारों ने चक्का जाम किया। आंदोलन के बाद प्रशासन और वेदांता प्रबंधन की ओर से बैठक का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है।

16 सितंबर को होगी बैठक
प्रभावित परिवारों के अनुसार, उनकी मांगों और समस्याओं पर चर्चा के लिए 16 सितंबर 2026 को बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक के लिए प्रभावित परिवारों को बुलाया गया है।
बताया गया है कि बैठक में वेदांता के अधिकारी कैप्टन धनंजय मिश्रा, तहसीलदार कोरबा बजरंग लाल साहू तथा बालको थाना प्रभारी युवराज तिवारी उपस्थित रहेंगे। बैठक में शांतिनगर प्रभावित परिवारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

आश्वासन से आगे बढ़कर निर्णय की अपेक्षा
प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनकी समस्याएं नई नहीं हैं। रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास जैसे मुद्दे उनके जीवन और भविष्य से सीधे जुड़े हुए हैं। इसलिए उनका जोर अब केवल आश्वासन पर नहीं, बल्कि स्पष्ट निर्णय और उसके समयबद्ध क्रियान्वयन पर है।
15 वर्षों से चले आ रहे संघर्ष के बाद होने वाली यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि इसमें प्रभावित परिवारों की मांगों पर प्रशासन और प्रबंधन का रुख स्पष्ट हो सकता है। हालांकि, बैठक में क्या निर्णय होता है और उन निर्णयों को किस समयसीमा में लागू किया जाता है, यह आगे महत्वपूर्ण होगा।

प्रभावित परिवारों की नजर अब ठोस समाधान पर
प्रभावित परिवारों की ओर से कहा गया है कि वर्षों से लंबित मांगों का समाधान न्यायसंगत और अधिकार आधारित तरीके से होना चाहिए। उनका कहना है कि विस्थापन और प्रभावित होने के बाद रोजगार, उचित मुआवजा तथा पुनर्वास उनके लिए केवल आर्थिक मुद्दे नहीं, बल्कि परिवारों के भविष्य और सम्मान से जुड़े प्रश्न हैं।
ऐसे में 16 सितंबर की बैठक को लेकर प्रभावित परिवारों में समाधान की उम्मीद है। साथ ही यह भी अपेक्षा है कि बैठक में लिए जाने वाले निर्णय केवल कागजों या आश्वासनों तक सीमित न रहें।

शांतिनगर प्रभावित परिवारों का 15 वर्षों का संघर्ष यह सवाल सामने रखता है कि विकास परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के अधिकारों का समाधान कितनी प्रभावी और समयबद्ध तरीके से किया जाता है। अब 16 सितंबर की बैठक इस संघर्ष के अगले पड़ाव के रूप में देखी जा रही है। प्रभावित परिवारों की वास्तविक अपेक्षा आश्वासन नहीं, बल्कि रोजगार, उचित मुआवजा, पुनर्वास और न्याय से जुड़े लंबित अधिकारों पर ठोस निर्णय की है।

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