कोरबा (पब्लिक फोरम)। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में शनिवार को कोरबा जिले में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला न्यायालय कोरबा के साथ कटघोरा, करतला और पाली की तालुका विधिक सेवा समितियों में भी मामलों की सुनवाई हुई। आयोजन में आपराधिक, सिविल, मोटर दुर्घटना, चेक बाउंस, वैवाहिक, श्रम, बैंक ऋण, राजस्व और अन्य समझौता योग्य मामलों का निराकरण किया गया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, लोक अदालत में 5,77,584 मामलों के निराकरण का उल्लेख किया गया है।
49 खंडपीठों के माध्यम से हुई मामलों की सुनवाई
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वावधान और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशन में आयोजित नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती नीता यादव ने किया।
लोक अदालत में न्यायाधीशों के अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, लीगल एड डिफेंस काउंसिल, जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी, अधिवक्ता, पैरालीगल वालंटियर तथा पक्षकार और आमजन उपस्थित रहे।
जिला न्यायालय कोरबा तथा कटघोरा, करतला और पाली की तालुका विधिक सेवा समितियों में लंबित मामलों और प्री-लिटिगेशन मामलों को लोक अदालत में रखा गया। इसके लिए कुल 49 खंडपीठों का गठन किया गया था।
कई तरह के मामलों का हुआ निराकरण
लोक अदालत में आपराधिक मामलों में राजीनामा योग्य प्रकरण, मोटर दुर्घटना दावा, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 से जुड़े चेक बाउंस के मामले, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, बैंक ऋण वसूली, धन वसूली और विद्युत एवं टेलीफोन बिल से संबंधित मामले शामिल रहे।
इसके अलावा भूमि अधिग्रहण, राजस्व न्यायालयों से संबंधित मामलों तथा अन्य समझौता योग्य वादों की भी सुनवाई की गई।
लंबित मामलों के निपटारे पर विशेष जोर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला न्यायालय और तालुका स्तर पर बड़ी संख्या में मामलों को निराकरण के लिए चिन्हित किया गया था। विज्ञप्ति में 5,72,560 प्रकरणों को निराकरण के लिए चिन्हित किए जाने का उल्लेख है।
वहीं, लोक अदालत में कुल 5,77,584 मामलों के सफलतापूर्वक निराकरण की जानकारी दी गई है। इनमें विभिन्न न्यायालयों में लंबित 5,931 मामलों में से 5,024 मामलों का निराकरण किए जाने तथा 25,497 राजस्व प्रकरणों के निराकरण का भी उल्लेख है।
लोक अदालत में स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया
नेशनल लोक अदालत के अवसर पर जिला न्यायालय परिसर में विभिन्न शासकीय विभागों की ओर से शिविर और सहायता केंद्र लगाए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के शिविर के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का हेल्प डेस्क भी बनाया गया।
जिला आयुष विभाग की ओर से लगाए गए स्वास्थ्य शिविर में न्यायालयीन कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों सहित 203 लोगों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार किया गया। मरीजों को आवश्यक आयुर्वेदिक दवाएं भी निःशुल्क वितरित की गईं।
शिविर में हृदय संबंधी समस्याओं, उदर रोग, सर्दी-जुकाम, खांसी, वात रोग, मधुमेह और अर्श जैसी समस्याओं से संबंधित मरीजों को उपचार एवं दवाएं उपलब्ध कराई गईं।
मामले का निराकरण होने पर पक्षकारों को दिए गए पौधे
लोक अदालत के दौरान वन विभाग कोरबा की ओर से पौधे उपलब्ध कराए गए। जिन पक्षकारों के मामलों का निराकरण हुआ, उन्हें न्यायालय परिसर में न्यायाधीशों द्वारा पौधे भेंट किए गए।
यह पहल लोक अदालत की प्रक्रिया को पर्यावरण संरक्षण के संदेश से जोड़ने वाली रही। साथ ही, पक्षकारों के लिए मामले के समाधान की प्रक्रिया को एक सकारात्मक सामाजिक संदेश के साथ जोड़ने का प्रयास भी किया गया।
हेल्प डेस्क ने पक्षकारों की मदद की
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के हेल्प डेस्क के माध्यम से पक्षकारों को उनके संबंधित न्यायालय और खंडपीठ तक पहुंचने में सहायता दी गई। विभिन्न विभागों, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, बैंकों और अन्य संबंधित संस्थाओं के सहयोग से आयोजन किया गया।
लोक अदालत का व्यापक महत्व
लोक अदालत का उद्देश्य केवल मामलों की संख्या कम करना नहीं है, बल्कि पक्षकारों को आपसी सहमति से अपेक्षाकृत सरल और कम खर्चीले तरीके से विवादों के समाधान का अवसर देना भी है। लंबे समय से चल रहे विवादों का समझौते के माध्यम से समाधान होने पर पक्षकारों को समय, धन और मानसिक तनाव से राहत मिल सकती है।
विशेष रूप से मोटर दुर्घटना, बैंक ऋण, चेक बाउंस, पारिवारिक विवाद और छोटे वित्तीय विवाद जैसे मामलों में समय पर समाधान पक्षकारों के लिए महत्वपूर्ण होता है। हालांकि लोक अदालत की सफलता का वास्तविक आकलन केवल निराकृत मामलों की संख्या से नहीं, बल्कि समझौते की गुणवत्ता और पक्षकारों की संतुष्टि से भी किया जाना चाहिए।
कोरबा में आयोजित नेशनल लोक अदालत ने न्याय तक आसान पहुंच और समझौते के माध्यम से विवादों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराया। बड़ी संख्या में मामलों का निराकरण इस प्रक्रिया की उपयोगिता को रेखांकित करता है। हालांकि जारी आंकड़ों में दिखाई दे रही विसंगतियों को आधिकारिक अंतिम आंकड़ों से स्पष्ट किया जाना जरूरी है। न्याय व्यवस्था में आंकड़ों की पारदर्शिता और पक्षकारों के हित – दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।






Recent Comments