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कोरबा में दिव्यांगजनों के लिए विशेष शिविर: 17 से 25 सितंबर तक जनपदवार आयोजन

कोरबा (पब्लिक फोरम)। जिले के दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड और आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 17 से 25 सितंबर तक विशेष मूल्यांकन एवं परीक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर आयोजित इन शिविरों में स्वास्थ्य परीक्षण, पंजीयन और पात्रतानुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जिले की पांचों जनपद पंचायतों में अलग-अलग तिथियों पर शिविर लगाए जाएंगे।

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जिला प्रशासन द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार करतला में 17 सितंबर, पाली में 21 सितंबर, कटघोरा में 23 सितंबर, पोड़ी-उपरोड़ा में 24 सितंबर और कोरबा में 25 सितंबर 2026 को विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे।
शिविर संबंधित जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा चयनित स्थान पर लगाए जाएंगे। स्थानीय स्तर पर शिविर आयोजित करने का उद्देश्य दिव्यांगजनों को प्रमाण पत्र, पंजीयन और अन्य सुविधाओं के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी को कम करना है।

स्वास्थ्य परीक्षण के साथ यूडीआईडी कार्ड के लिए पंजीयन
शिविर में आने वाले दिव्यांगजनों का स्वास्थ्य परीक्षण चिकित्सकीय दल द्वारा किया जाएगा। दिव्यांगता प्रमाण पत्र और यूडीआईडी कार्ड के लिए आवश्यक पंजीयन की प्रक्रिया भी की जाएगी। परीक्षण के बाद पात्र पाए जाने वाले दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके अलावा चलित चिकित्सा इकाई के माध्यम से आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था रहेगी।

दिव्यांगजनों को शिविर तक पहुंचाने की भी जिम्मेदारी
प्रशासन ने शिविरों में अधिक से अधिक पात्र दिव्यांगजनों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित जनपद पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपी है। इसमें दिव्यांगजनों को शिविर स्थल तक लाने-ले जाने की व्यवस्था, पंजीयन में सहयोग, सहायक उपकरण के लिए पात्र लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित करना और स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार करना शामिल है।
नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों के अधिकारियों को भी अपने-अपने क्षेत्रों के दिव्यांगजनों को शिविरों की जानकारी देने और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

कई विभाग मिलकर करेंगे शिविरों का संचालन
शिविरों के सफल संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग, समाज कल्याण विभाग, समग्र शिक्षा और जनसंपर्क विभाग के बीच समन्वय किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग चिकित्सकीय जांच की व्यवस्था करेगा, जबकि समाज कल्याण विभाग आवश्यक प्रपत्रों और सहायक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। जिला परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षा द्वारा पंजीयन तथा विभागों के बीच आवश्यक समन्वय की जिम्मेदारी निभाई जाएगी। वहीं, शिविरों की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए जनसंपर्क विभाग प्रचार-प्रसार करेगा।

शिविर में आने से पहले ये दस्तावेज रखें तैयार
जिला प्रशासन के अनुसार शिविर में आने वाले दिव्यांगजनों को आवश्यक दस्तावेज साथ लाने होंगे। इनमें—

– दो रंगीन पासपोर्ट आकार के फोटो
– आधार कार्ड की छायाप्रति
– पैन कार्ड की छायाप्रति
– दिव्यांगता प्रमाण पत्र की छायाप्रति

शामिल हैं।
दिव्यांगजनों से निर्धारित तिथि पर संबंधित जनपद के शिविर में उपस्थित होकर उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने की अपील की गई है।

दिव्यांगता प्रमाण पत्र और यूडीआईडी कार्ड कई सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। वहीं, जरूरत के अनुसार उपलब्ध कराए जाने वाले सहायक उपकरण दिव्यांगजनों की दैनिक गतिविधियों को आसान बनाने और उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने में उपयोगी हो सकते हैं।
इन शिविरों की उपयोगिता इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि स्वास्थ्य परीक्षण, प्रमाण पत्र एवं यूडीआईडी पंजीयन और सहायक उपकरण से जुड़ी प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर एक साथ उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, शिविरों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसकी सूचना वास्तव में जरूरतमंद दिव्यांगजनों तक समय पर पहुंचे और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शिविर स्थल तक पहुंचने में पर्याप्त सहयोग मिले।

सुविधा तभी सार्थक, जब जरूरतमंद तक पहुंचे
दिव्यांगजनों के लिए किसी सरकारी सुविधा की वास्तविक उपयोगिता केवल उसके घोषित होने से तय नहीं होती। उसकी सफलता इस बात से तय होती है कि जरूरतमंद व्यक्ति तक वह सुविधा कितनी आसानी, समयबद्धता और सम्मान के साथ पहुंचती है।

कोरबा जिले में होने वाले ये विशेष शिविर इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। यदि पात्र दिव्यांगजनों को समय पर जानकारी, सुगम पहुंच और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग मिलता है, तो प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड और सहायक उपकरण से जुड़ी प्रक्रियाओं को स्थानीय स्तर पर आसान बनाने की यह पहल उनके अधिकारों, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने में उपयोगी साबित हो सकती है।

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