होमदेशMMDR अधिनियम 2026 के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा: राज्यों के खनिज अधिकार...

MMDR अधिनियम 2026 के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा: राज्यों के खनिज अधिकार बहाल करने की मांग

खनिज कर अधिकारों को लेकर उठे सवाल, MMDR अधिनियम रद्द करने की मांग

- Advertisement -

नई दिल्ली (पब्लिक फोरम)। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2026 यानी MMDR संशोधन अधिनियम को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। संगठन ने आरोप लगाया है कि नए कानून से खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर राज्यों की कराधान शक्ति सीमित हो गई है। SKM ने अधिनियम वापस लेने और राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा करने की मांग की है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर राज्यों की कराधान शक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया था। नए कानून ने इस फैसले के वित्तीय प्रभाव को लेकर व्यापक बहस को जन्म दिया है।

17 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बना कानून
MMDR संशोधन विधेयक 2026 को 10 अगस्त 2026 को लोकसभा में पेश किया गया। संसद के दोनों सदनों से इसे पारित किए जाने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी 17 अगस्त को मिली। उसी दिन इसे राजपत्र में प्रकाशित किया गया। हालांकि, अधिनियम में यह भी कहा गया है कि यह उस तारीख से प्रभावी होगा जिसे केंद्र सरकार राजपत्र में अधिसूचना के जरिए निर्धारित करेगी।

नए कानून में MMDR अधिनियम, 1957 के दायरे को बढ़ाते हुए ‘खनिज-युक्त भूमि’ को भी केंद्र के नियामक नियंत्रण के दायरे में शामिल किया गया है। इसके लिए कानून में ‘खनिज-युक्त भूमि’ की नई परिभाषा जोड़ी गई है।

धारा 9D पर सबसे बड़ा विवाद
अधिनियम की नई धारा 9D राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर कर, उपकर या अन्य शुल्क लगाने की शक्ति को सीमित करती है। ऐसे कर केवल केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों या प्रतिबंधों के अनुरूप लगाए जा सकेंगे।

कानून में यह भी प्रावधान है कि अधिनियम लागू होने से पहले लगाए गए ऐसे कर या उपकर, जिन्हें राज्य सरकार ने अभी तक वसूल या प्राप्त नहीं किया है, उन्हें अमान्य माना जाएगा। वहीं, जो राशि पहले ही जमा या वसूल की जा चुकी है, उसे वापस करने की बाध्यता नहीं होगी।
यही प्रावधान राज्यों के राजस्व अधिकार और संघीय ढांचे को लेकर विवाद का मुख्य आधार बना हुआ है।

2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा विवाद
25 जुलाई 2024 को Mineral Area Development Authority बनाम Steel Authority of India Ltd. (SAIL) मामले में सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला दिया था। अदालत ने कहा था कि राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने की विधायी शक्ति प्राप्त है और रॉयल्टी स्वयं कर नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने के संदर्भ में संविधान की राज्य सूची की प्रविष्टि 49 और खनिज अधिकारों से संबंधित प्रविष्टि 50 अलग-अलग क्षेत्रों में काम करती हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्यों के सामने पुराने खनिज करों की वसूली का रास्ता खुला था। बाद की कार्यवाही में अदालत ने इस फैसले के वित्तीय प्रभाव और पिछली अवधि की देनदारियों से जुड़े प्रश्नों पर भी विचार किया।

SKM का आरोप है कि 2026 का संशोधन इसी वित्तीय प्रभाव को सीमित करने के उद्देश्य से लाया गया है। हालांकि, यह संगठन का राजनीतिक और नीतिगत आकलन है; इसे कानून के आधिकारिक उद्देश्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

सरकार का तर्क: खनन क्षेत्र में एक समान कर व्यवस्था
केंद्र सरकार ने संशोधन को अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है। सरकार के अनुसार, विभिन्न राज्यों में अलग-अलग कर और उपकर व्यवस्था से खनन क्षेत्र में अनिश्चितता पैदा होती थी। इससे खनन की लागत बढ़ने, निवेश प्रभावित होने और परियोजनाओं की व्यावसायिक व्यवहार्यता पर असर पड़ने की आशंका थी।

सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य खनिज क्षेत्र के लिए स्थिर, समान और पूर्वानुमेय वित्तीय व्यवस्था तैयार करना है। सरकार ने यह भी कहा है कि राज्यों को मिलने वाला खनन राजस्व इस कानून से समाप्त नहीं होता और राज्यों को खनन राजस्व का बड़ा हिस्सा मिलता रहेगा।
इस प्रकार विवाद का मूल प्रश्न केवल खनन कर का नहीं, बल्कि राज्य बनाम केंद्र की विधायी और वित्तीय शक्तियों के संतुलन का भी है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने आदिवासी और कृषि हितों से जोड़ा मुद्दा

SKM ने कहा है कि खनिज संपदा मुख्य रूप से उन्हीं राज्यों और क्षेत्रों में स्थित है जहां बड़ी आदिवासी आबादी रहती है। संगठन का कहना है कि खनिजों से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल आदिवासी कल्याण, कृषि संकट से निपटने, ग्रामीण उद्योगों के विकास और रोजगार सृजन में किया जाना चाहिए।
SKM ने सभी मुख्यमंत्रियों से राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा करने तथा खनिज राजस्व का उपयोग स्थानीय विकास के लिए करने का आह्वान किया है। संगठन ने राजनीतिक दलों और किसान-आदिवासी संगठनों से भी अधिनियम के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है।

झारखंड और ओडिशा के राजस्व का सवाल

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने दावा किया है कि 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर संभावित पूर्वव्यापी खनिज करों से झारखंड को करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये और ओडिशा को करीब 1 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता था, जो नए कानून के कारण प्रभावित होगा।

इन आंकड़ों को SKM ने अपने प्रेस नोट में प्रस्तुत किया है। इन्हें स्वतंत्र सरकारी आंकड़ों के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित राज्यों के आधिकारिक आकलन और केंद्र सरकार के वित्तीय आंकड़ों को देखना आवश्यक होगा।

खनिज, निवेश और राष्ट्रीय हित
सरकार का एक प्रमुख तर्क यह भी है कि महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता भारत की औद्योगिक और रणनीतिक जरूरतों से जुड़ी है। दुर्लभ मृदा तत्वों सहित कई खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, रक्षा और आधुनिक विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए केंद्र एक ऐसी व्यवस्था चाहता है जिसमें खनिज क्षेत्र में निवेश और उत्पादन को अधिक स्थिर वातावरण मिले।

दूसरी ओर, SKM का तर्क है कि निवेश और खनिज उत्पादन बढ़ाने की नीति में राज्यों के वित्तीय अधिकार, स्थानीय समुदायों के हित और आदिवासी क्षेत्रों में संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

यहीं इस कानून की सबसे बड़ी नीतिगत चुनौती दिखाई देती है – खनिज क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की एकरूपता और राज्यों के संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए।

MMDR अधिनियम 2026 ने भारत में खनिज संसाधनों के स्वामित्व से आगे बढ़कर राजस्व, संघवाद और स्थानीय अधिकारों पर बहस को फिर सामने ला दिया है। केंद्र इसे खनन क्षेत्र में स्थिरता और निवेश के लिए आवश्यक सुधार बता रहा है, जबकि संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) इसे राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और संघीय ढांचे पर चोट मानता है। अब इस विवाद का वास्तविक परीक्षण संसद, राज्यों और संभवतः न्यायपालिका के स्तर पर होगा। खनिज संपदा का सवाल अंततः केवल राजस्व का प्रश्न नहीं है – यह इस बात से भी जुड़ा है कि प्राकृतिक संसाधनों से पैदा होने वाला आर्थिक लाभ “किसके लिए और किस तरीके से इस्तेमाल किया जाता है।”

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments