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1 सितंबर की ‘दिल्ली चलो’ रैली को लेकर सीपीआई ने किया जनआंदोलन का आह्वान

कोरबा (पब्लिक फोरम)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने श्रम कानूनों में बदलाव, महंगाई, बेरोजगारी और निजीकरण के विरोध में 1 सितंबर 2026 को दिल्ली में आयोजित ‘दिल्ली चलो – बदलाव जरूरी है’ रैली में व्यापक भागीदारी का आह्वान किया है। पार्टी के कोरबा जिला सचिव कॉमरेड पवन कुमार वर्मा ने मजदूरों, किसानों, छात्रों, नौजवानों और आम लोगों से रैली में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों को लेकर कई सवाल उठाए।

श्रम अधिकारों में बदलाव पर सीपीआई की आपत्ति
21 अगस्त को जारी प्रेस विज्ञप्ति में पवन कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार श्रम कानूनों में ऐसे बदलाव कर रही है, जिनसे लंबे मजदूर आंदोलनों के माध्यम से हासिल अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि श्रम कानूनों में किए जा रहे बदलावों का असर नौकरी की सुरक्षा, ट्रेड यूनियन अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा पर पड़ सकता है।
सीपीआई नेता ने दावा किया कि श्रम नीतियों में बदलाव का लाभ बड़े कॉरपोरेट घरानों और नियोक्ताओं को मिल रहा है, जबकि मजदूरों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं। हालांकि, इन दावों पर केंद्र सरकार या संबंधित पक्ष का पक्ष इस प्रेस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है।

महंगाई, बेरोजगारी और निजीकरण को लेकर सवाल
वर्मा ने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी के साथ सार्वजनिक क्षेत्र में निजीकरण की प्रक्रिया ने आम लोगों के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ाई हैं। उन्होंने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।

उनके अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर किए जाने और असंगठित श्रमिकों को पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलने के मुद्दे पर व्यापक जनबहस और आंदोलन की आवश्यकता है। सीपीआई का मानना है कि मजदूर, किसान, छात्र, नौजवान और महिलाएं जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उनके पीछे आर्थिक नीतियों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव है।

छात्रों पर कार्रवाई की निंदा
सीपीआई जिला सचिव ने जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और पैलेट गन चलाने की घटना को निंदनीय बताया।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग कर रहे युवाओं की आवाज को दमन के जरिए दबाया नहीं जा सकता। वर्मा ने सरकार से छात्रों की मांगों पर बातचीत करने और उनकी बात सुनने की मांग की।

एकजुट संघर्ष का आह्वान
सीपीआई ने 1 सितंबर की दिल्ली रैली को मजदूरों और किसानों के साथ छात्रों, नौजवानों तथा महिलाओं के मुद्दों को एक साथ उठाने का अवसर बताया है। पार्टी का कहना है कि अलग-अलग वर्गों की समस्याओं को व्यापक सामाजिक और आर्थिक नीतियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
पवन कुमार वर्मा ने देशभर के मजदूरों, किसानों, छात्रों, नौजवानों और आम नागरिकों से दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की है।

1 सितंबर की रैली से यह स्पष्ट होगा कि श्रम कानूनों, रोजगार, महंगाई, निजीकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विपक्षी राजनीतिक दलों तथा विभिन्न जनसंगठनों की लामबंदी किस स्तर तक पहुंचती है। इन मुद्दों पर सरकार का पक्ष और आंदोलनकारियों की मांगों के बीच संवाद की गुंजाइश लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

श्रम अधिकार, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा केवल मजदूरों तक सीमित विषय नहीं हैं। इनका प्रभाव परिवारों, स्थानीय अर्थव्यवस्था और व्यापक समाज पर पड़ता है। ऐसे में 1 सितंबर की ‘दिल्ली चलो’ रैली केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि रोजगार और श्रम अधिकारों से जुड़े सवालों को सार्वजनिक बहस के केंद्र में लाने का एक प्रयास भी है।

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