स्वतंत्रता दिवस पर ऐक्टू ने उठाया श्रमिकों और महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा
कोरबा/बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक केंद्र कोरबा स्थित बालकोनगर में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर एकता पीठ परिसर (ऐक्टू कार्यालय) में ध्वजारोहण सह विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। एल्युमिनियम कामगार संघ (ऐक्टू – All India Central Council of Trade Unions) और लघु उद्यमी संगठन के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रमिक नेताओं ने देश में कामगारों, महिलाओं और शोषित वर्गों के सामाजिक-आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

बालको नगर में आयोजित इस समारोह में उद्योग क्षेत्र के श्रमिकों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और स्थानीय लघु उद्यमियों ने अपने परिवारों एवं बच्चों के साथ हिस्सा लिया। स्वतंत्रता संग्राम के महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के बाद वक्ताओं ने वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एल्युमिनियम कामगार संघ के संस्थापक अध्यक्ष एवं लघु उद्यमी संगठन के संयोजक बी.एल. नेताम ने कहा कि आजादी के लंबे अरसे बाद भी सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने में गहरी विषमताएं आई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा:
“हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस योजनाबद्ध विकास और समतामूलक समाज का सपना देखा था, वह आज भी अधूरा है। भारत में वास्तविक स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की स्थापना के लिए आम मेहनतकश जनता का यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।”

समारोह की मुख्य अतिथि, ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन्स एसोसिएशन (AIPWA – अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन) की जिला प्रभारी एवं ऐक्टू संचालक मंडल सदस्य श्रीमती पुष्पलता सिंह ने महिलाओं और वंचित समूहों की स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा:
“आजादी के इस दौर में भी समाज की आधी आबादी यानी महिलाएं अपने बुनियादी अधिकारों को हासिल करने में पीछे हैं। हमें अपने आंदोलनों को नए सिरे से अपडेट करना होगा और शोषितों व अल्पसंख्यकों को साथ लेकर संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे बढ़ना होगा।”
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि श्रीमती जगेश्वरी केसकर ने संविधान पर बढ़ते दबावों पर चिंता व्यक्त करते हुए शिक्षा, रोजगार, आर्थिक समानता और सामाजिक न्याय की लड़ाई को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के मुख्य विचार बिंदु:
🔹 श्रमिक अधिकार एवं सामाजिक सुरक्षा: औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत असंगठित व ठेका मजदूरों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण और न्यायसंगत वेतन की मांग की गई।
🔹 संवैधानिक अधिकारों की रक्षा: वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि शिक्षा, रोजगार और समानता के संवैधानिक अधिकारों से आम नागरिकों को वंचित नहीं किया जा सकता।
🔹 सामूहिक भागीदारी: महिलाओं, अल्पसंख्यकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एक मंच पर लाकर जनांदोलन को अधिक समावेशी बनाने पर सहमति बनी।
समारोह में रामजी शर्मा, रूप दास महंत, राजाराम केसकर, जितेंद्र सिंह, शैलेंद्र शर्मा, राजेश महंत, मनीष साहू, निर्मल कसार और नकुल अहिरवार सहित कई गणमान्य नागरिकों व यूनियन कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए।
यह आयोजन केवल ध्वजारोहण की औपचारिक रस्म तक सीमित नहीं था, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र कोरबा के आम मजदूरों और उनके परिवारों के लिए अपने अधिकारों के प्रति सजग होने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। बढ़ते कॉर्पोरेट प्रभाव और श्रम कानूनों में बदलाव के इस दौर में, बालको नगर से उठी यह आवाज आने वाले समय में स्थानीय कामगारों और अपने स्वरोजगार के लिए जूझते छोटे उद्यमियों को अपने सामाजिक-आर्थिक न्याय की लड़ाई के लिए एकजुट करने में एक अहम भूमिका निभाएगी।





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