कोरबा (पब्लिक फोरम)| कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा यानी टीएल की अहम बैठक में कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जिले के विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की गहन समीक्षा की। उन्होंने सभी प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में हिदायत दी कि आम जनता से जुड़े हर मामले का समाधान तय समय के भीतर और पूरी प्राथमिकता के साथ होना चाहिए। कलेक्टर की इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाना और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

हाल ही में हुई बारिश के कारण जिले के कई इलाकों में सड़कें, पुल-पुलिया और शासकीय संपत्तियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, लोक निर्माण विभाग, नगरीय निकायों, जनपद पंचायतों और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को जल्द से जल्द नुकसान का ब्योरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। ताकि इन क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत का काम तुरंत शुरू कराया जा सके और लोगों को आवाजाही में किसी तरह की दिक्कत न हो।
इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर चर्चा करते हुए उन्होंने मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य कर्मचारियों को मुस्तैद रहकर मलेरिया और अन्य बीमारियों की समय पर जांच व इलाज सुनिश्चित करने को कहा गया है। सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाओं और चिकित्सीय सुविधाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया।
बैठक में प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री जनदर्शन से प्राप्त आवेदनों के साथ-साथ सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के निपटारे की स्थिति भी देखी गई। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि आम लोगों की समस्याओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुनें और उनका त्वरित समाधान निकालें। इस दौरान शासकीय भूमि पर अवैध रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण करने पर रोक लगाने के सख्त निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कहीं ऐसा पाया जाता है, तो निर्माण कार्य तुरंत रुकवाया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कलेक्टर का रुख बेहद कड़ा रहा। टीएल प्रकरणों के निराकरण में ढिलाई बरतने के कारण सीएमओ पाली और सीएमओ छुरी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, जिला शिक्षा अधिकारी तथा पाली के बीईओ को नोटिस थमाने के साथ ही उनका वेतन रोकने का आदेश दिया गया। समाज कल्याण विभाग के उप संचालक द्वारा नशा मुक्ति अभियान में रुचि न दिखाने पर उनके वेतन पर भी रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए।
बैठक में जिले के दूरस्थ और पहुंचविहीन पारा-टोलों में बिजली पहुंचाने की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में अब तक बिजली नहीं पहुंची है, वहां प्राथमिकता के आधार पर विद्युतीकरण का काम पूरा किया जाए। इसके अलावा, अपार आईडी और जन्म प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए उन्होंने तहसीलदारों और संबंधित अधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभाने को कहा।
बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत एल्बेंडाजोल दवा के वितरण की समीक्षा भी की गई। इसमें शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को मिलकर काम करने और हर पात्र बच्चे को दवा खिलाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
राजस्व विभाग के कामकाज की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सभी एसडीएम और तहसीलदारों को आपसी समन्वय से काम करने की सलाह दी। उन्होंने विवादित और अविवादित नामांतरण के मामलों को समय सीमा में निपटाने, भू-अभिलेखों की गलतियों को सुधारने और डायवर्सन के मामलों को आरआई के माध्यम से तेजी से सुलझाने को कहा। वहीं पोड़ी उपरोड़ा और अजगरबहार जैसी तहसीलों में मसाहती ग्रामों के सर्वे कार्य और एग्रीस्टैक बकेट क्लेम के कामों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
इस महत्वपूर्ण बैठक में निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय, जिला पंचायत के सीईओ प्रतीक जैन सहित जिले के तमाम प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
जिले में प्रशासनिक कसावट और विकास कार्यों की इस गति को आप किस तरह देखते हैं? क्या आपको लगता है कि इस तरह की बैठकों से जमीनी स्तर पर सुधार आएगा? आप अपने विचार, सुझाव और अनुभव हमें ईमेल आईडी 750publicforum@gmail.com पर भेज सकते हैं।





Recent Comments