गुरु पूर्णिमा पर माँ सर्वमंगला घाट पर भव्य हसदेव आरती का आयोजन, नदी संरक्षण के लिए उमड़ा जनसैलाब
कोरबा (पब्लिक फोरम)| कोरबा की जीवनदायिनी हसदेव नदी को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने का संकल्प गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर और अधिक मजबूत हो गया। कोरबा के प्रसिद्ध माँ सर्वमंगला मंदिर घाट पर नमामि हसदेव सेवा समिति द्वारा भव्य हसदेव आरती का आयोजन किया गया। शाम पांच बजे से शुरू हुए इस धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम में न केवल भक्ति की बयार बही, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए एक बड़ा जन-संदेश भी दिया गया। उपस्थित सभी लोगों ने हसदेव नदी के साथ-साथ उसकी सहायक नदियों और आसपास के प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषण से मुक्त रखने की प्रतिज्ञा ली।
नमामि हसदेव सेवा समिति लंबे समय से कोरबा की मुख्य जलधारा हसदेव नदी को बचाने और इसके घाटों के सौंदर्यीकरण के लिए लगातार प्रयासरत है। समिति का मानना है कि नदियां केवल जल का जरिया नहीं हैं, बल्कि ये हमारी संस्कृति, समाज और जीवन का आधार हैं। इसी सोच के तहत समिति द्वारा हर महीने की पूर्णिमा को माँ सर्वमंगला मंदिर घाट पर विशेष आरती का आयोजन किया जाता है। इस बार गुरु पूर्णिमा का अवसर होने के कारण यह आरती और भी खास रही।

कार्यक्रम में हसदेव नदी के धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व को बताते हुए समाज के हर वर्ग से आगे आने की अपील की गई। वक्ताओं ने कहा कि जल स्रोतों को स्वच्छ रखना अब केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिक की सक्रिय सहभागिता सबसे ज्यादा जरूरी है। यदि हम आज अपनी नदियों को नहीं बचाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। इसलिए व्यक्तिगत और सामूहिक, दोनों स्तरों पर प्रयास करने होंगे।
इस पावन अवसर पर अनेक गणमान्य नागरिकों ने मुख्य और विशिष्ट यजमान के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में मुख्य यजमान के रूप में ज्योति भूषण प्रताप सिंह विधि महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. किरण चौहान शामिल हुईं। वहीं विशिष्ट यजमान के रूप में सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सी.एस.ई.बी. के प्राचार्य राजकुमार देवांगन, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती इंदु अग्रवाल, दयानंद एंग्लो वैदिक विद्यालय एस.ई.सी.एल. के व्याख्याता नरसिंह शास्त्री और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय साडा कन्या की व्याख्याता श्रीमती सविता पाठक ने भी आरती में भाग लेकर अपनी गरिमामयी उपस्थिति दी।
गुरु पूर्णिमा पर आयोजित इस हसदेव आरती ने धार्मिक आस्था को प्रकृति प्रेम के साथ जोड़ने का बेहतरीन उदाहरण पेश किया। समिति के इस अभियान ने यह साबित कर दिया है कि जब आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक साथ मिलते हैं, तो बदलाव की नई राह बनती है। घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं ने भी नदी परिसर में गंदगी न फैलाने और पानी को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया।
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