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धमधागढ़ गोंड महासभा: एम.डी. ठाकुर के निर्वाचन पर हाई कोर्ट की मुहर, कमलेश ध्रुव की याचिका खारिज

हाई कोर्ट के फैसले से गोंड महासभा अध्यक्ष विवाद समाप्त

दुर्ग (पब्लिक फोरम)। केन्द्रीय गोंड महासभा धमधागढ़ के अध्यक्ष पद को लेकर लगभग एक वर्ष से चल रहे विवाद पर उच्च न्यायालय के फैसले के बाद नया मोड़ आ गया है। महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता विष्णु देव ठाकुर के अनुसार, उच्च न्यायालय ने कमलेश ध्रुव (शोरी) की याचिका खारिज करते हुए 17 फरवरी 2026 को हुए पुनर्गठन (चुनाव) को वैध माना है। महासभा का दावा है कि इस निर्णय से एम.डी. ठाकुर के अध्यक्ष पद पर निर्वाचन को न्यायिक मान्यता मिल गई है।

महासभा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि न्यायालय के आदेश के बाद अध्यक्ष पद को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया है। संगठन का कहना है कि अब एम.डी. ठाकुर ही केन्द्रीय गोंड महासभा धमधागढ़ के वैध अध्यक्ष हैं और संगठन से जुड़े सभी प्रशासनिक एवं संगठनात्मक निर्णय उन्हीं के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

महासभा ने यह भी दावा किया है कि न्यायालय के फैसले के बाद कमलेश ध्रुव अब न तो महासभा के अध्यक्ष हैं और न ही ध्रुव गोंड समाज के किसी पद पर अधिकृत रूप से कार्यरत हैं। हालांकि, इस संबंध में कमलेश ध्रुव की ओर से तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

30 जुलाई की बैठक को लेकर उठे सवाल
महासभा के अनुसार, उन्हें जानकारी मिली है कि कमलेश ध्रुव द्वारा 30 जुलाई को गोंडवाना भवन, दुर्ग में धमधागढ़ महासभा की बैठक बुलाने की सूचना जारी की गई थी। संगठन का आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बाद उनके पास अध्यक्ष के रूप में बैठक बुलाने का अधिकार नहीं है।

महासभा ने अपने बयान में कहा है कि यदि कोई बैठक अध्यक्ष के अधिकार का दावा करते हुए आयोजित की जाती है तो वह संगठन की दृष्टि में अधिकृत नहीं मानी जाएगी। साथ ही संगठन ने यह भी कहा कि ऐसी बैठक न्यायालय के आदेश की भावना के विपरीत हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में न्यायालय द्वारा किसी संभावित अवमानना (Contempt of Court/न्यायालय की अवमानना) की कार्यवाही हुई है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

समाज के सदस्यों से अपील
महासभा ने समाज के सदस्यों से अपील की है कि वे केवल संगठन द्वारा अधिकृत बैठकों में ही भाग लें। बयान में कहा गया है कि न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हुए समाज में भ्रम की स्थिति से बचना आवश्यक है।

संगठन की ओर से प्रमुख बातें इस प्रकार रखी गईं—

🔹17 फरवरी 2026 के पुनर्गठन को न्यायालय ने वैध माना।
🔹एम.डी. ठाकुर को वैध अध्यक्ष बताया गया।
🔹अनधिकृत बैठकों से दूर रहने की अपील की गई।
🔹समाज के लोगों से संगठनात्मक एकता बनाए रखने का आग्रह किया गया।

वर्षभर चला था विवाद
धमधागढ़ महासभा के अध्यक्ष पद को लेकर पिछले लगभग एक वर्ष से संगठन के भीतर मतभेद बने हुए थे। इसी विवाद के चलते मामला न्यायालय तक पहुंचा। अब महासभा का कहना है कि उच्च न्यायालय के निर्णय से नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।

हालांकि, किसी भी संगठनात्मक विवाद में न्यायालय के आदेश की वास्तविक कानूनी व्याख्या आदेश की प्रति और संबंधित पक्षों के आधिकारिक पक्ष पर निर्भर करती है। इसलिए विवाद के सभी पहलुओं को समझने के लिए न्यायालय के विस्तृत आदेश और दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद केन्द्रीय गोंड महासभा धमधागढ़ के नेतृत्व को लेकर संगठन ने विवाद समाप्त होने का दावा किया है। अब सबसे बड़ी चुनौती समाज में संगठनात्मक एकता बनाए रखने और न्यायालय के आदेश के अनुरूप आगे की गतिविधियों को संचालित करने की होगी। यदि सभी पक्ष संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हैं, तो इससे समाज में लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता समाप्त हो सकती है।

(संपादकीय टिप्पणी: यह समाचार महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता विष्णु देव ठाकुर द्वारा जारी बयान पर आधारित है। समाचार में वर्णित कानूनी दावों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित उच्च न्यायालय के विस्तृत आदेश और कमलेश ध्रुव का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)

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