रायपुर/कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के सभी जिलों और पांचों संभागों के 37 आदिवासी संगठनों के पदाधिकारियों की समन्वय बैठक रायपुर के भैरव नगर स्थित नागरची गोंडवाना भवन में आयोजित की गई। बैठक में सामाजिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा के बाद सर्वसम्मति से “आदिवासी समन्वय मंच छत्तीसगढ़” के गठन का निर्णय लिया गया। मंच का उद्देश्य राज्यभर के आदिवासी समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों को साझा मुद्दों पर एकजुट कर सामूहिक रूप से आवाज उठाना बताया गया।
बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने कहा कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में आदिवासी समाज अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन विषयों पर अलग-अलग स्तर पर प्रयास होने के बावजूद एक साझा राज्यव्यापी मंच की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर संयुक्त मंच बनाने का निर्णय लिया।

बैठक के दौरान यह भी तय किया गया कि आगामी 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पूरे छत्तीसगढ़ में आदिवासी पहचान, संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य समाज के युवाओं को आदिवासी इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना रहेगा।

बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने जिला स्तर पर भी समन्वित गतिविधियों को बढ़ाने पर जोर दिया। इसके तहत सभी जिलों में स्थानीय प्रशासन को सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया। ज्ञापनों के माध्यम से संबंधित जिलों के आदिवासी समाज से जुड़े स्थानीय मुद्दों और मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा जाएगा।

बैठक के प्रमुख निर्णय
🔹 “आदिवासी समन्वय मंच छत्तीसगढ़” का सर्वसम्मति से गठन।
🔹 सामाजिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक मुद्दों पर संयुक्त संघर्ष का निर्णय।
🔹 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी पहचान के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित करने की योजना।
🔹युवाओं में आदिवासियत, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता अभियान चलाने पर सहमति।
सभी जिलों में स्थानीय प्रशासन को सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपने का निर्णय।
बैठक में सर्व आदिवासी समाज जिला कोरबा का भी प्रतिनिधित्व रहा। कोरबा से जिलाध्यक्ष सेवक राम मरावी, महासचिव डॉ. श्यामलाल कंवर, उपाध्यक्ष परमेश्वर सिंह जगत, निर्मल सिंह राज तथा युवा प्रभाग से के.सी. कंवर सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। प्रतिनिधियों ने राज्यस्तरीय निर्णयों को जिला स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय राज्य की बड़ी आबादी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भूमि, वनाधिकार, शिक्षा, रोजगार, संस्कृति और पारंपरिक पहचान जैसे विषय लंबे समय से सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में विभिन्न संगठनों का एक साझा मंच पर आना सामाजिक समन्वय और सामूहिक संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
आने वाले दिनों में इस मंच की सक्रियता का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि यह विभिन्न जिलों के स्थानीय मुद्दों को किस तरह संगठित रूप से उठाता है और प्रशासन के साथ संवाद स्थापित करता है। यदि प्रस्तावित कार्यक्रम और जागरूकता अभियान प्रभावी ढंग से संचालित होते हैं, तो इससे आदिवासी समाज के युवाओं की भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की साझा आवाज भी अधिक संगठित रूप में सामने आ सकती है।





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