कोरबा (पब्लिक फोरम)। कोरबा के कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बैंक प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की एक अहम बैठक लेकर सरकारी योजनाओं के तहत ऋण वितरण की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर और प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना को गति देने पर विशेष जोर दिया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक समय पर पहुंचना प्रशासनिक और बैंकिंग व्यवस्था की संयुक्त जिम्मेदारी है, जिसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं होनी चाहिए।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में विभिन्न शासकीय योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों की वर्तमान स्थिति, उनके परीक्षण और ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया की गहन समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु आम लोगों और छोटे व्यवसायियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना रहा।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में विभिन्न शासकीय योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों की वर्तमान स्थिति, उनके परीक्षण और ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया की गहन समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु आम लोगों और छोटे व्यवसायियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना रहा।
प्राथमिकताओं पर चर्चा और ऋण प्रक्रिया में तेजी
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने ‘प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना’ को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली योजना बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि आम नागरिकों के बिजली बिल के बोझ को कम करने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। कलेक्टर ने बैंकों को निर्देशित किया कि वे प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध परीक्षण करें और पात्र हितग्राहियों के ऋण की स्वीकृति व वितरण प्रक्रिया में तेजी लाएं।
*कलेक्टर का मुख्य निर्देश: “बैंक केवल एक वित्तीय संस्थान की तरह काम न करें, बल्कि शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में अपनी सक्रिय सामाजिक भूमिका निभाएं। लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर तेजी से निराकरण सुनिश्चित किया जाए।”
स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक उन्नति पर जोर
‘प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना’ की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने नगरीय निकायों से भेजे गए आवेदनों पर बैंकों को तत्काल कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि स्ट्रीट वेंडर्स (रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों) को समय पर ऋण मिलना बेहद जरूरी है। समय पर मिली आर्थिक मदद इन छोटे व्यापारियों को साहूकारों के चंगुल से बचाती है और उन्हें गरिमापूर्ण तरीके से स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ती है।
व्यापक प्रचार-प्रसार और जागरूकता की जरूरत
बैठक में केवल ऋण वितरण की समीक्षा ही नहीं हुई, बल्कि इसके सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं पर भी चर्चा की गई। कलेक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि ‘प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना’ का जमीन पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लोगों के बीच जाकर उन्हें योजना के दूरगामी लाभों के बारे में समझाएं और उन्हें आवेदन करने के लिए प्रेरित करें, ताकि जिले के अधिक से अधिक लोग इस योजना के दायरे में आ सकें।
इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक समीक्षा बैठक में जिले के शीर्ष अधिकारी और बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:
🔹ईशान जायसवाल (सहायक कलेक्टर)
🔹 दिनेश नाग (सीईओ, जिला पंचायत)
🔹कृष्णा भगत (लीड बैंक मैनेजर)
🔹विभिन्न नगरीय निकायों के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ), बैंक प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी।
शासकीय ऋण योजनाएं केवल कागजी आंकड़े या वित्तीय लक्ष्य नहीं हैं, बल्कि ये समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने और आर्थिक संबल देने का एक सशक्त माध्यम हैं। चाहे वह सौर ऊर्जा से घरों को रोशन करने की बात हो या छोटे रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को आत्मनिर्भर बनाने की, इन योजनाओं की सफलता पूरी तरह से बैंकों की संवेदनशीलता और सक्रियता पर टिकी है। कोरबा प्रशासन की यह समीक्षा पहल यदि धरातल पर पूरी मुस्तैदी से लागू होती है, तो यह जिले के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को बदलने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।





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