होमआसपास-प्रदेशकोरबा जनदर्शन: कलेक्टर ने 141 समस्याओं के त्वरित निराकरण के दिए निर्देश

कोरबा जनदर्शन: कलेक्टर ने 141 समस्याओं के त्वरित निराकरण के दिए निर्देश

कोरबा (पब्लिक फोरम)। कोरबा जिले के शहरी और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों लोगों ने कलेक्टर जनदर्शन में अपनी समस्याएं रखीं। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कुल 141 आवेदनों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध और पारदर्शी निराकरण के निर्देश दिए। जनसमस्याओं में बिजली, पानी, आवास, राजस्व विवाद और प्रधानमंत्री योजनाओं के लाभ न मिलने तक के मामले शामिल रहे।

141 आवेदन, कई विभागों से जुड़ी समस्याएं
कलेक्टोरेट सभाकक्ष में 15 जून को आयोजित जनदर्शन में नागरिकों ने विभिन्न विभागों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। कलेक्टर श्री दुदावत ने प्रत्येक आवेदक को संवेदनशीलता के साथ सुना। प्राप्त आवेदनों में पंचायत विकास कार्य, ई-रिक्शा दिलाने, ट्रांसफॉर्मर अपग्रेडेशन, शौचालय और आवास निर्माण, मोबाइल टॉवर लगवाने जैसे मामले शामिल थे।

रीइसके अलावा भूमि एवं राजस्व विवाद, वनाधिकार पट्टा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राशि भुगतान, पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ, राशन कार्ड, सीमांकन, खाता विभाजन, विद्युत व्यवस्था में सुधार और पेयजल आपूर्ति से जुड़े मामले भी प्रमुख रहे।

कलेक्टर के सख्त निर्देश
कलेक्टर ने सभी आवेदनों को संबंधित विभागों को प्रेषित करते हुए शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से उपलब्ध कराया जाए। हर आवेदन का गंभीरतापूर्वक परीक्षण कर यथाशीघ्र राहत सुनिश्चित की जाए।

इस मौके पर अपर कलेक्टर देवेंद्र कुमार पटेल, अपर कलेक्टर ओंकार यादव, डिप्टी कलेक्टर टी.आर. भारद्वाज सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।

जनदर्शन की सार्थकता और चुनौतियां
जनदर्शन प्रशासन और आम नागरिक के बीच सीधा संवाद का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है। कोरबा जैसे जिले में, जहां शहरी क्षेत्रों से लेकर दूरस्थ ग्रामीण अंचलों तक विकास की असमानताएं मौजूद हैं, ऐसे आयोजन शिकायतों के निस्तारण की रफ्तार बढ़ाते हैं। हालांकि, 141 आवेदनों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निराकरण करना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी है। अक्सर देखा गया है कि मौके पर दिए गए आश्वासन बाद में अधर में लटक जाते हैं। ऐसे में कलेक्टर के ‘समयबद्ध निराकरण’ के निर्देश तभी सार्थक होंगे, जब उनकी नियमित मॉनिटरिंग हो। पेयजल, बिजली और राजस्व विवाद जैसे मुद्दे जनजीवन को सीधे प्रभावित करते हैं – इनमें किसी भी लापरवाही से प्रशासन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।

कोरबा का यह जनदर्शन सिर्फ शिकायतों का एक मंच नहीं था, बल्कि प्रशासन की जनता के प्रति जवाबदेही की एक तस्वीर भी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कलेक्टर के सख्त निर्देशों का कितनी गंभीरता से पालन होता है। आम आदमी की उम्मीदें इन्हीं 141 आवेदनों के हल से जुड़ी हैं – क्योंकि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की असली कसौटी यही है कि वह आखिरी पंक्ति में खड़े नागरिक की समस्या का समाधान कितनी तेजी और निष्पक्षता से करती है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments