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खरसिया के तेन्दुमुडी में आदि कर्मयोगी शिविर से महिलाओं को मिली राहत, चेहरे पर लौटी रौनक

खरसिया, बरगढ़ खोला(पब्लिक फोरम)  | 25 मई 2026 को
ग्राम पंचायत तेन्दुमुडी में आयोजित आदि कर्मयोगी अभियान शिविर में महिलाओं को बड़ी राहत मिली है। शिविर के दौरान कई महिलाओं ने नए राशन कार्ड के लिए आवेदन किया था। अब राशन कार्ड बनकर मिलते ही महिलाओं के चेहरे पर रौनक लौट आई। लाभार्थी महिलाओं ने शासन, प्रशासन और आदि कर्मयोगी शिविर का आभार जताया।

क्या है आदि कर्मयोगी अभियान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह अभियान चलाया जा रहा है। इसका लक्ष्य जनजातीय समाज को सशक्त कर विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। 2030 तक चिन्हांकित गांवों को विकसित गांवों में बदलने का लक्ष्य रखा गया है।

भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 10 जुलाई 2025 को “आदि कर्मयोगी अभियान” शुरू किया था। इसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों तक शासन की योजनाओं और सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है।

2047 के विकसित भारत के सपने से जुड़ा अभियान
जब भारत 2047 में आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए जरूरी है कि कोई भी वर्ग पीछे न छूटे। आदिवासी समाज को आगे बढ़ाए बिना यह सपना अधूरा रहेगा। यह अभियान शासन और समाज के बीच की दूरी कम कर योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुंचा रहा है।

वृहद स्तर पर हो रहा प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अभियान को सेवा पर्व का रूप दिया है। छत्तीसगढ़ में वृहद स्तर पर आदि कर्मयोगियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये कर्मयोगी घर-घर जाकर जनजातीय परिवारों की जरूरतें समझ रहे हैं और उन्हें केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ दिला रहे हैं। राज्य और जिला स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है।

आदि सेवा केंद्र होंगे स्थापित
आदिम जाति कल्याण मंत्री राम विचार नेताम ने अधिकारियों को पंचायतों में आदि सेवा केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इन केंद्रों के जरिए जनजातीय परिवारों को पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, छात्रवृत्ति, रोजगार और कौशल विकास जैसी सुविधाओं के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभियान को सेवा पर्व के रूप में मनाकर योजनाओं को घर-घर पहुंचाया जाए।

भारत की जनजातीय आबादी 10 करोड़ से अधिक है। इतने बड़े समुदाय को मुख्यधारा में लाए बिना 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता। आदि कर्मयोगी अभियान इसी सोच को मूर्त रूप दे रहा है।

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