राजनांदगांव (पब्लिक फोरम)। भीषण गर्मी में भी न थकने वाले मजदूरों का संघर्ष जारी है। क्रेस्ट स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड (अमलगम ग्रुप), जोरातराई, राजनांदगांव के लगभग 600 ठेका श्रमिक 14 मई 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं – और यह हड़ताल अभी तक जारी है। दिन हो या रात, धूप हो या लू – मजदूर और उनके परिवार डिगे नहीं हैं।
यह आंदोलन संघर्षशील इंजीनियरिंग श्रमिक संघ (ऐक्टू एवं छमुमो संबद्ध) के अध्यक्ष भीमराव बागडे के नेतृत्व में चल रहा है। इसमें आसपास के 35 से 40 गांवों के मजदूर और उनके परिजन एकजुट होकर शामिल हैं।
मांगें न्यूनतम, पर प्रबंधन अड़ा है
मजदूरों की मांगें कोई असाधारण नहीं हैं – वे केवल वही मांग रहे हैं जो कानून और सरकारी दिशा-निर्देश उन्हें देते हैं:
– सरकार की श्रेणी के अनुसार न्यूनतम वेतन
– 20 प्रतिशत बोनस
– अन्य वैधानिक श्रमिक अधिकार
इन बुनियादी मांगों को लेकर जब मजदूर सड़क पर उतरे, तो कंपनी प्रबंधन ने न बातचीत का रास्ता अपनाया, न ही कोई सकारात्मक कदम उठाया। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू), छत्तीसगढ़ ने प्रबंधन के इस अड़ियल और असंवेदनशील रवैये की कड़ी निंदा करते हुए हड़ताली मजदूरों के साथ पूरी एकजुटता जाहिर की है।
“जानलेवा महंगाई में इतनी कम मजदूरी” – ऐक्टू
ऐक्टू के राज्य महासचिव बृजेन्द्र तिवारी, जिन्होंने आज आंदोलन स्थल पर मजदूरों को संबोधित भी किया, ने साफ कहा – “इस जानलेवा महंगाई के दौर में इतनी कम मजदूरी पर मजदूरों को गंभीर आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है। यह हड़ताल भीषण गर्मी में भी रात-दिन जारी है – यही इन मजदूरों की बेबसी और इरादे, दोनों को एक साथ बयान करती है।”
ऐक्टू ने एक तीखा सवाल भी उठाया – “एक तरफ सरकार ‘सुशासन तिहार’ मना रही है, दूसरी तरफ मजदूरों को अपनी न्यूनतम मांगों के लिए हड़ताल पर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। यह किस सुशासन की तस्वीर है?”
ऐक्टू की मांग: तत्काल हस्तक्षेप करे सरकार
ऐक्टू ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि मजदूरों की जायज मांगों का तत्काल समाधान किया जाए। संगठन ने चेताया है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।





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