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बालको-वेदांता में महिलाओं को नौकरी नहीं – 33% आरक्षण की उड़ रही धज्जियां, समिति ने राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंचाई आवाज़

बालको-वेदांता में महिलाओं को 33% आरक्षण नहीं दिए जाने पर हम होंगे कामयाब महिला शक्ति समिति ने राष्ट्रीय महिला आयोग, CM छत्तीसगढ़ और कोरबा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

कोरबा (पब्लिक फोरम)। कोरबा जिले की महिलाएं थकी नहीं हैं – वे लड़ रही हैं। भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको-वेदांता) द्वारा महिलाओं को रोज़गार और मज़दूरी में अवसर न देने तथा सरकार द्वारा निर्धारित 33 प्रतिशत महिला आरक्षण नीति की खुलेआम अनदेखी किए जाने के विरोध में “हम होंगे कामयाब महिला शक्ति समिति” ने सोमवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ और कोरबा कलेक्टर को जनदर्शन में ज्ञापन सौंपा। संगठन की पदाधिकारियों ने साफ़ शब्दों में कहा – बालको प्रबंधन का यह रवैया न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि हज़ारों पढ़ी-लिखी, काबिल महिलाओं के सपनों पर पैर रखने जैसा है।

पर्दे के पीछे की सच्चाई
कोरबा के बालकोनगर में बसा भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड – यानी बालको – देश के सबसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों में से एक है। इस कंपनी पर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना अनिवार्य है। लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।

“हम होंगे कामयाब महिला शक्ति समिति” – एक गैर-राजनीतिक सामाजिक संगठन – पिछले कई वर्षों से कोरबा जिले में महिलाओं को जन जागरूकता से जोड़ने और उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए काम कर रहा है। इस संगठन की पदाधिकारियों ने बताया कि बालको प्रबंधन न तो महिलाओं को नियमित भर्ती में जगह दे रहा है, न ही पावर प्लांट संबंधी कार्यों में – जो महिलाएं सुचारू रूप से कर सकती हैं – उन्हें वहां नियुक्त किया जा रहा है। और जब भी महिलाएं अवसर मांगती हैं, प्रबंधन की तरफ से कोई स्पष्ट कारण भी नहीं बताया जाता।

महिलाओं ने सुनाया अपना दर्द
समिति की केंद्रीय अध्यक्ष एवं समाजसेवी लक्ष्मी दीदी और सचिव श्रीमती कांति चौहान के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा:
“कोरबा जिले में बड़ी संख्या में शिक्षित, योग्य और आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाएं हैं जो रोज़गार की तलाश में हैं। बालको में उन्हें नियम के अनुसार अवसर मिलना चाहिए। लेकिन दरवाज़ा बंद है – बिना कारण बताए।”

ये महिलाएं वो नहीं हैं जो हार मान लें। कई घरों की एकमात्र कमाऊ सदस्य, कई जो पति के बीमार होने पर परिवार का बोझ उठाती हैं – इनके लिए बालको जैसी कंपनी में एक नौकरी सिर्फ आमदनी नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का रास्ता है।

समिति की प्रमुख मांगें
समिति ने राष्ट्रीय महिला आयोग, मुख्यमंत्री और कलेक्टर से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

– बालको-वेदांता में महिला 33% आरक्षण के तहत विशेष भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
– योग्य एवं इच्छुक महिलाओं को विभिन्न विभागों एवं मज़दूरी कार्यों में भरपूर अवसर दिए जाएं।
– भर्ती से इनकार करने पर प्रबंधन लिखित में कारण बताए।
– महिलाओं के प्रति समान अवसर और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।

यह केवल बालको का मामला नहीं है
देश भर में औद्योगिक प्रतिष्ठानों में महिला आरक्षण और समान अवसर की नीतियां तो बनती हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन कागज़ों तक ही सिमटा रहता है। कोरबा जैसे औद्योगिक जिले में, जहां एक तरफ कोयला और एल्युमिनियम की भट्टियां जलती हैं, वहीं दूसरी तरफ आदिवासी और मज़दूर परिवारों की महिलाएं रोज़गार के दरवाज़े पर दस्तक देती रह जाती हैं। यह विडंबना ही है कि जो कंपनी इस ज़मीन की कोख से मुनाफा उठाती है, वही यहां की बेटियों को नज़रअंदाज़ करती है।

समिति ने विश्वास जताया है कि शासन और संबंधित विभाग महिलाओं के हित में सकारात्मक निर्णय लेंगे। संयोजक संतोषी परिहार और सामाजिक सेविका समाजसेवी लक्ष्मी दीदी ने कहा कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन आगे और बड़े आंदोलन के लिए तैयार है।
“यह लड़ाई सिर्फ नौकरी के लिए नहीं है – यह लड़ाई उस हक के लिए है जो हर भारतीय महिला को संविधान ने दिया है: समान अवसर, समान सम्मान।”

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