कोरबा (पब्लिक फोरम)। किसी भी औद्योगिक हादसे की असली परीक्षा तब होती है जब खतरा अचानक दस्तक दे। इसी सच्चाई को ध्यान में रखते हुए आज बालको संयंत्र में एक महत्वपूर्ण मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया – ताकि जब कोई वास्तविक संकट आए, तो हर हाथ तैयार हो, हर कदम सधा हुआ हो।
कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशानुसार आयोजित यह मॉक ड्रिल पावर डिवीजन अंतर्गत 1200 मेगावाट यूनिट-3 एवं 4 के केमिकल प्रोसेस यूनिट (सीपीयू) स्थित कास्टिक सोडा टैंक क्षेत्र में संपन्न हुई। यह कवायद केंद्र सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), नई दिल्ली के उन निर्देशों के तहत की गई, जिनमें देशभर के औद्योगिक प्रतिष्ठानों में आपदा प्रबंधन की तैयारी को समय-समय पर परखने पर जोर दिया गया है।

जब टैंक से ‘रिसाव’ हुआ…
अभ्यास के दौरान कास्टिक सोडा टैंक के फ्लैंज से रासायनिक रिसाव की एक आभासी किंतु यथार्थवादी आपात स्थिति तैयार की गई। जैसे ही रिसाव का संकेत मिला, ऑपरेटर ने तत्काल सेंट्रल कंट्रोल रूम को सूचित किया। पलभर में फायर, मेडिकल, सिक्योरिटी और रेस्क्यू टीमें हरकत में आ गईं। सभी दल निर्धारित समयसीमा के भीतर घटनास्थल पर पहुँचे और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन करते हुए स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में ले लिया। प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित घोषित करने के बाद साइट इंसिडेंट कंट्रोलर ने आपातकाल समाप्त किया और समीक्षा बैठक आयोजित की।

प्रशासन और उद्योग – एक साथ, एक मंच पर
इस मॉक ड्रिल की विशेषता यह रही कि इसमें जिला प्रशासन और संयंत्र प्रबंधन, दोनों कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। जिला प्रशासन की ओर से अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल, एसडीएम सरोज महिलांगे, डिप्टी डायरेक्टर इंडस्ट्रियल हेल्थ एंड सेफ्टी विजय सिंह पोटाई, जिला खनिज अधिकारी प्रमोद नायक, सब डिवीजनल ऑफिसर पीडब्ल्यूडी राकेश द्विवेदी, असिस्टेंट इंजीनियर पीडब्ल्यूडी श्रीमती नम्रता वर्मा के साथ ही नगर निगम की फायर टीम और जिला अस्पताल की आपातकालीन मेडिकल टीम भी मौजूद रही।
कंपनी की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक राजेश कुमार ने चीफ इंसिडेंट कंट्रोलर के रूप में संपूर्ण आपातकालीन प्रबंधन का नेतृत्व किया। उनके साथ गीत साहू (साइट इंसिडेंट कंट्रोलर), मयंक श्रीवास्तव (वर्क इंसिडेंट कंट्रोलर) और भारतेंदु कमल पांडे (चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर) ने समन्वय संभाला।
“बालको का सुरक्षा तंत्र पूरी तरह सक्षम” – पोटाई
डिप्टी डायरेक्टर इंडस्ट्रियल हेल्थ एंड सेफ्टी विजय सिंह पोटाई ने कहा कि बालको संयंत्र में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ है और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र पूरी तरह प्रभावी है। उन्होंने सभी टीमों के बीच देखे गए त्वरित समन्वय और अनुशासित कार्यवाही की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की मॉक ड्रिल न केवल औद्योगिक सुरक्षा, बल्कि जनसुरक्षा की गारंटी को भी मजबूत करती हैं।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी और इस प्रकार की मॉक ड्रिल नियमित रूप से आयोजित की जाती रहेंगी – ताकि किसी भी वास्तविक आपात स्थिति में प्रतिक्रिया न केवल तेज हो, बल्कि चूकविहीन भी हो।





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