कोरबा/बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में परसाभाटा स्थित BALCO (वेदांता) के मुख्य द्वार के सामने शांति नगर संघर्ष समिति का अनिश्चितकालीन धरना आज अपने “73वें दिन” में प्रवेश कर गया। BALCO वेदांता कंपनी के 1200 मेगावाट पावर प्लांट के कूलिंग टावर से फैल रहे जानलेवा प्रदूषण और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की मांग को लेकर यह आंदोलन न थका है, न झुका है।
धुएं में घुटती ज़िंदगी – कूलिंग टावर का ज़हर
शांति नगर, जिसका नाम सुनते ही मन में शांति का एहसास होता है, असल में पिछले कई वर्षों से एक अशांत जीवन जीने को मजबूर है। BALCO के विशाल पावर प्लांट के कूलिंग टावर से निकलने वाला धुआं, वाष्प और रासायनिक अवशेष इस बस्ती के आसमान को रोज़ ढक लेते हैं। घरों की दीवारें काली पड़ चुकी हैं, बच्चों की खांसी थमती नहीं और बुजुर्गों की सांसें उखड़ती रहती हैं।
यहां के निवासी अक्सर पूछते हैं – “जब कंपनी को मुनाफा होता है, तो उसका धुआं हमारे हिस्से क्यों?”
पांच मांगें – एक इंसान की ज़िंदगी जीने का हक
धरने पर बैठे प्रभावित परिवारों की मांगें कोई विलासिता नहीं, बल्कि बुनियादी मानवीय अधिकार हैं:-
– स्थायी रोजगार – जिनकी ज़मीनें और आजीविका छिन गई, उन्हें पक्का काम चाहिए
– पुनर्वास हेतु भूमि – विस्थापन का दर्द भोगने वाले परिवारों को छत और ज़मीन मिले
– उचित मुआवजा – नुकसान का हिसाब-किताब हो, वायदों से नहीं, कागज़ से
– मुफ्त चिकित्सा सुविधा – प्रदूषण जनित बीमारियों का इलाज कंपनी की जिम्मेदारी है
– मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था – साफ पानी, साफ हवा और सम्मान का जीवन
धरने पर बुजुर्ग, जवान और माँएं – संकल्प एक
आज भी धरना स्थल पर बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग डटे हुए हैं। गर्मी की तपती दोपहर हो या रात की ठंडी हवा – शांति नगर संघर्ष समिति के सदस्य अपनी जगह से नहीं हिले।
युवाओं में गुस्सा और उम्मीद दोनों एक साथ जिंदा हैं। वे जानते हैं कि यह लड़ाई सिर्फ मुआवजे की नहीं, बल्कि अपने वजूद को बचाने की है।
“न्याय नहीं, तो शांति नहीं” – एक नारा नहीं, एक प्रतिज्ञा
शांति नगर संघर्ष समिति के प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि “जब तक न्यायसंगत मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।” उनका यह संघर्ष पूरी तरह शांतिपूर्ण है – न तोड़फोड़, न उग्रता – लेकिन उनका इरादा उतना ही दृढ़ है जितना BALCO का ऊंचा कूलिंग टावर।
“न्याय नहीं, तो शांति नहीं” – यह महज एक नारा नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों की सामूहिक प्रतिज्ञा है जिनके सपने कूलिंग टावर के धुएं में धुंधले हो गए हैं।
73 दिनों का यह आंदोलन अब एक परीक्षा बन चुका है – BALCO वेदांता प्रबंधन के लिए भी, और प्रशासन के लिए भी। सवाल यह है कि क्या एक बहुराष्ट्रीय कंपनी की सामाजिक जिम्मेदारी केवल कागज़ों तक सीमित रहेगी, या शांति नगर के लोगों को उनका हक मिलेगा?
इन संघर्षों को जनता देख रही है। और इतिहास दर्ज कर रहा है।





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