ठेकेदारों के शोषण के खिलाफ सड़क पर उतरे सैकड़ों मजदूर, CMD कार्यालय घेराव के बाद प्रबंधन ने टेके घुटने
बिलासपुर (पब्लिक फोरम)। वेतन की कटौती, ओवरटाइम की अनदेखी और ठेकेदारों की खुलेआम गुंडागर्दी – यही है उस दर्द की दास्तान, जिसे सरायपाली के मजदूर, ड्राइवर और ऑपरेटर बरसों से चुपचाप सहते आए थे। लेकिन आज बिलासपुर की सड़कों पर वह चुप्पी टूट गई।
दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की सरायपाली परियोजना में ठेकेदारों द्वारा श्रमिकों के साथ हो रहे व्यवस्थित शोषण के विरोध में “छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना” (गैर-राजनीतिक संगठन) के नेतृत्व में सैकड़ों मजदूरों ने एसईसीएल के बिलासपुर स्थित सीएमडी कार्यालय का जोरदार घेराव किया। नारों की गूंज से पूरा कार्यालय परिसर थर्रा उठा।
चेतावनी दी थी, अनसुनी हुई – तो मोर्चा खोला
यह प्रदर्शन अचानक नहीं था। श्रमिकों ने 20 अप्रैल को एसईसीएल प्रबंधन को विधिवत ज्ञापन सौंपकर 28 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया था। आठ दिन बीत गए, कोई सुनवाई नहीं हुई। तब छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने हड़ताल और घेराव का रास्ता अपनाया।
लंबी और कड़ी वार्ता के बाद अंततः एसईसीएल प्रबंधन को झुकना पड़ा और सभी मांगों को “7 दिनों के भीतर” हल करने का ठोस आश्वासन दिया गया। इसके बाद श्रमिकों ने हड़ताल स्थगित की।

क्या थीं मजदूरों की मांगें?
श्रमिकों की मांगें न कोई विशेषाधिकार थीं, न कोई बड़ी सौगात – बल्कि वे उनके बुनियादी अधिकार थे जो लंबे समय से दबाए जा रहे थे:-
– एचपीसी दर के अनुसार पूरा वेतन और ओवरटाइम का भुगतान
– हर माह अनिवार्य वेतन पर्ची जारी करना
– सभी श्रमिकों को नियुक्ति प्रमाण पत्र देना
– स्थानीय छत्तीसगढ़िया युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता
– बिना कारण हटाए गए मजदूरों और ड्राइवरों की तत्काल बहाली
– ठेकेदारों की गुंडागर्दी, धमकी और उत्पीड़न पर कड़ी कार्रवाई

नेताओं की आवाज: “छत्तीसगढ़िया मजदूर अब जाग चुके हैं”
संगठन के दप्रदेश संगठन मंत्री उमागोपाल” ने दो टूक कहा कि बाहरी ठेकेदारों द्वारा स्थानीय मजदूरों का शोषण अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संरक्षक “दादा रामगुलाम ठाकुर” ने कहा कि छत्तीसगढ़िया मजदूरों को उनका हक मिलना चाहिए और ठेकेदारों की मनमानी का यह दौर समाप्त होना ही होगा।
“प्रदेश अध्यक्ष दिलीप मिरी” ने स्पष्ट किया कि संगठन मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष जारी रखेगा। “प्रदेश उपाध्यक्ष धीरेंद्र साहू” ने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों में मांगें पूरी नहीं हुईं, तो संगठन इससे भी बड़े और व्यापक आंदोलन के लिए तैयार है।
प्रदर्शन में प्रदेश प्रभारी मोनी क. कठोतरे, जिला संयोजक अतुल दास महंत सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और सेनानी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने एसईसीएल प्रबंधन से त्वरित, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद जताई है। संगठन का संदेश साफ है – “7 दिन की मोहलत है, उसके बाद चुप्पी नहीं, आंदोलन होगा।”
यह लड़ाई केवल वेतन की नहीं है – यह छत्तीसगढ़ की माटी, उसके मजदूरों और उनके स्वाभिमान की लड़ाई है।





Recent Comments