जांजगीर-चांपा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में एक बार फिर औद्योगिक लापरवाही का दर्दनाक चेहरा सामने आया है। चांपा स्थित “प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड” के प्लांट में शुक्रवार को एक भट्टी में अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। धमाके की आवाज सुनते ही पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार से माहौल दहशत में डूब गया। हादसे में कई मजदूरों के घायल होने की खबर है, हालांकि अभी तक घायलों की आधिकारिक संख्या सामने नहीं आई है।
एम्बुलेंस की कतार ने बयां की गंभीरता
घटना के तुरंत बाद प्लांट गेट से 4 से 5 एम्बुलेंस को अंदर जाते देखा गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि घायल मजदूरों को बेहद जल्दबाजी में वाहनों में लादकर नजदीकी अस्पतालों की ओर रवाना किया गया। एम्बुलेंस की यह कतार खुद बता रही थी कि अंदर हालात कितने भयावह थे। परिजनों में हाहाकार मचा हुआ था – कोई फोन पर जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा था, तो कोई प्लांट के बाहर बदहवास खड़ा था।

पहली बार नहीं हुआ यह हादसा
सूत्रों के मुताबिक, यह प्रकाश इंडस्ट्रीज में पहली दुर्घटना नहीं है। इससे पहले भी “कई बार हादसे हो चुके हैं” और हर बार प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में “औद्योगिक सुरक्षा विभाग” ने प्लांट का निरीक्षण भी किया था और कार्रवाई भी की थी – फिर भी सुरक्षा मानकों को हवा में उड़ा दिया गया। बार-बार हो रही दुर्घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या यहाँ काम करने वाले मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं?
मजदूर: जिनकी रोज़ी और रोटी इसी भट्टी की आग से पकती है
प्रकाश इंडस्ट्रीज जैसे बड़े प्लांटों में काम करने वाले अधिकतर मजदूर आसपास के गाँवों से आते हैं। उनके लिए यह नौकरी परिवार चलाने का एकमात्र सहारा होती है। वे हर रोज खतरे के साये में काम करते हैं – और प्रबंधन की उदासीनता के बीच उनकी सुरक्षा महज एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाती है। आज जो घायल हुए, उनमें से हर एक किसी का बेटा है, किसी का पति, किसी का पिता।
प्रशासन अलर्ट, आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार
फिलहाल जिला प्रशासन और संबंधित विभाग मौके पर नजर बनाए हुए हैं। घायलों की सटीक संख्या, उनकी वर्तमान हालत और विस्फोट के कारणों की जानकारी अभी आधिकारिक स्तर पर आनी बाकी है। “पब्लिक फोरम” लगातार इस मामले की निगरानी कर रहा है और जैसे ही नई जानकारी मिलेगी, पाठकों तक पहुँचाई जाएगी।
जरूरी सवाल जो टाले नहीं जा सकते
यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है – “कारखानों में सुरक्षा मानक क्यों नहीं लागू हो पाते?” जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस तरह की दुर्घटनाएं होती रहेंगी – और मजदूर यूँ ही नाहक अपनी जान गँवाते रहेंगे।





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