बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। बालको परसाभांठा स्थित शहीद चौक पर अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद की प्रतिमा के आसपास फैली गंदगी, अतिक्रमण और असामाजिक गतिविधियों के विरोध में अधिवक्ता अब्दुल नफीस खान ने आज शुक्रवार को एक दिवसीय शांतिपूर्ण अनशन शुरू किया। सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक चलने वाले इस अनशन का उद्देश्य प्रशासन का ध्यान शहीद स्थल की बदहाल स्थिति की ओर आकर्षित करना और उसके सम्मान की रक्षा करना है।
शहीद चौक, जो कभी श्रद्धा और प्रेरणा का प्रतीक माना जाता था, आज अव्यवस्था का शिकार हो गया है। प्रतिमा के आसपास शराबखोरी, कचरा फेंकना और जूठे बर्तनों का ढेर आम दृश्य बन चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह स्थिति न केवल सार्वजनिक स्थल की गरिमा को ठेस पहुंचा रही है, बल्कि नई पीढ़ी के सामने गलत उदाहरण भी पेश कर रही है।
अधिवक्ता अब्दुल नफीस खान ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर उन्होंने पहले जन-शिकायत पोर्टल के माध्यम से और निगम आयुक्त को लिखित रूप से अवगत कराया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन की इस निष्क्रियता से आहत होकर उन्होंने अनशन का रास्ता चुना।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि शहीद के सम्मान और नागरिक जिम्मेदारी को निभाने का प्रयास है। उनका कहना है कि “जिस मिट्टी ने हमें आज़ादी के लिए लड़ने वाले महानायक दिए, उसी मिट्टी पर उनकी प्रतिमा का अपमान होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”
स्थानीय नागरिकों में भी इस मुद्दे को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों ने अनशन स्थल पर पहुंचकर नैतिक समर्थन दिया और प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम अपने शहीदों के सम्मान को लेकर सच में संवेदनशील हैं। अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे ऐतिहासिक और प्रेरणादायक स्थल धीरे-धीरे अपनी पहचान खो देंगे।
अंततः यह मामला सिर्फ एक प्रतिमा या एक चौक का नहीं है, बल्कि हमारी सामूहिक चेतना और जिम्मेदारी का है। शहीदों का सम्मान बनाए रखना केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।





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