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भीषण गर्मी में प्यासा दैहानपारा: बालकोनगर के वार्ड 42 में जल संकट गहराया, महिलाएं महापौर से गुहार की तैयारी में

बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। भीषण गर्मी के बीच नगर पालिका निगम की जल आपूर्ति व्यवस्था एक बार फिर चरमरा गई है। वार्ड क्रमांक 42, बालकोनगर के दैहानपारा मोहल्ले में लंबे समय से पानी की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे लोगों को पीने और रोजमर्रा के कामों के लिए गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय महिलाओं ने 22 अप्रैल, बुधवार को महापौर से मिलकर समस्या के समाधान की मांग करने का निर्णय लिया है।

मोहल्ले के लोगों का कहना है कि घरों में टेप नल तो लगाए गए हैं, लेकिन उनमें नियमित पानी नहीं आता। स्थिति इतनी खराब है कि लोगों को शिव मंदिर के पास लगे एकमात्र सार्वजनिक नल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। सुबह से ही वहां लंबी कतार लग जाती है, जहां एक-एक बाल्टी पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।

महिलाओं की बढ़ी परेशानी, विवाद की स्थिति
पानी की कमी का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ रहा है। उन्हें दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है और कई बार लाइन में खड़े होने के दौरान आपसी विवाद भी हो जाते हैं। एक स्थानीय महिला ने बताया, “कभी-कभी तो पूरे दिन पानी नहीं मिलता। छोटे बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करना मुश्किल हो जाता है।”

हर साल की समस्या, समाधान अब तक नहीं
यह संकट कोई नई बात नहीं है। हर साल गर्मी के मौसम में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। सवाल यह उठता है कि जब बुनियादी ढांचा मौजूद है, तो आखिर लोगों तक पानी क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। यह प्रशासनिक लापरवाही है या व्यवस्था में कोई गंभीर खामी- इसका जवाब अब तक स्पष्ट नहीं है।

चुनाव के वादे बनाम हकीकत
वार्ड क्रमांक 42 नगर निगम चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा था, जहां 15 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। चुनाव के समय विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए गए थे। सुबह-सुबह प्रचार के लिए रैलियां निकाली जाती थीं और लोगों से समर्थन मांगा जाता था।

लेकिन चुनाव खत्म होते ही हालात बदल गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो पार्षद और न ही अन्य जनप्रतिनिधि अब उनकी समस्याओं की सुध लेने पहुंचते हैं। देहनपारा के निवासी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

प्रशासन पर उठते सवाल
देश के विकास और वैश्विक छवि की बातों के बीच जब नागरिकों को पीने का पानी तक नहीं मिल पाता, तो यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या विकास केवल कागजों और भाषणों तक सीमित है? क्या बुनियादी जरूरतों की पूर्ति अब भी प्राथमिकता नहीं बन पाई है?

“दैहानपारा का जल संकट केवल एक मोहल्ले की समस्या नहीं है, बल्कि यह शहरी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाली स्थिति है। अब निगाहें 22 अप्रैल की उस मुलाकात पर टिकी हैं, जहां महिलाएं महापौर से अपनी पीड़ा साझा करेंगी। देखना होगा कि यह पहल केवल आश्वासन तक सीमित रहती है या फिर वास्तव में लोगों की प्यास बुझाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं।”

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