नई दिल्ली (पब्लिक फोरम)। देश की संसद में बड़े ढोल-नगाड़े के साथ पारित हुआ महिला शक्ति वंदन अधिनियम आज भी कागजों में बंद है। मोदी सरकार इसे परिसीमन की शर्त से बांधकर लागू करना चाहती है – और यही शर्त अब बड़े टकराव की वजह बन गई है।
बुधवार को दिल्ली के प्रतिष्ठित “प्रेस क्लब ऑफ इंडिया” में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) के नेतृत्व में विभिन्न महिला संगठनों, महिला सांसदों और सामाजिक न्याय के पक्षधर बुद्धिजीवियों ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। सभी ने एक स्वर में मांग की – “33% महिला आरक्षण बिना किसी शर्त और बिना किसी देरी के तत्काल लागू किया जाए।”
महिलाओं के कंधे पर बंदूक रखकर साम्प्रदायिक एजेंडा नहीं चलेगा
ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव श्वेता राज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीधे और तीखे शब्दों में कहा कि मोदी सरकार महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ जोड़कर दरअसल अपने साम्प्रदायिक एजेंडे को जमीन पर उतारना चाहती है। उन्होंने कहा “महिलाओं के कंधे पर बंदूक रखकर देश को बांटने की यह राजनीति हम किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। 33% आरक्षण बिना किसी संशोधन और बिना किसी शर्त के लागू होना चाहिए।”
लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर हमले का आरोप
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रावधानों को पीछे धकेलते हुए एक “फासीवादी एजेंडे” को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि परिसीमन की आड़ में न केवल महिला आरक्षण को अनिश्चितकाल के लिए टाला जा रहा है, बल्कि देश के “संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों” को भी कमजोर किया जा रहा है।
हाशिए की महिलाओं को भी मिले चुनावी भागीदारी का अवसर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी जोर देकर कहा गया कि केवल आरक्षण पर्याप्त नहीं है। “दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग और जेंडर माइनोरिटी” समुदाय से आने वाली महिलाओं को चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक सहायता भी मिलनी चाहिए – ताकि संसद में सच्चे अर्थों में समाज के हर तबके की नुमाइंदगी हो सके।
एकजुट आवाज़: परिसीमन की शर्त खारिज करो
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित सभी संगठनों और व्यक्तित्वों ने “महिला शक्ति वंदन बिल को परिसीमन से जोड़ने की राजनीति की कड़े शब्दों में निंदा” की और सरकार को चेतावनी दी कि अगर यह आरक्षण जल्द बेशर्त लागू नहीं हुआ, तो देशभर में महिला आंदोलन और तेज होगा।
“ऐपवा का स्पष्ट संदेश है – महिला आरक्षण कोई राजनीतिक तोहफा नहीं, यह संवैधानिक अधिकार है। इसे किसी एजेंडे की बंधक नहीं बनने दिया जाएगा।”





Recent Comments