रायगढ़ (पब्लिक फोरम)। कानून की नजर में उम्र कम थी, लेकिन घर में बारात की तैयारी पूरी हो चुकी थी। रायगढ़ जिले के एक गांव में 20 वर्ष 5 माह के एक नाबालिग युवक का विवाह 3 अप्रैल 2026 को होने वाला था – और यह जानकारी जैसे ही जिला प्रशासन तक पहुंची, प्रशासनिक मशीनरी तत्काल हरकत में आ गई।
विश्वस्त सूत्रों से मिली सूचना के आधार पर जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग के नेतृत्व में पुलिस विभाग के सहयोग से एक संयुक्त दल का गठन किया गया। यह टीम बुधवार को संबंधित ग्राम पहुंची और बालक के शैक्षणिक एवं अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की। दस्तावेज बोल रहे थे – बालक की उम्र अभी 21 वर्ष की कानूनी सीमा से 7 माह कम है।
जांच के बाद टीम ने परिजनों के साथ विस्तृत संवाद किया। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के कानूनी प्रावधानों और इसके दुष्परिणामों को सरल भाषा में समझाया गया। इस बीच बालिका पक्ष और उनके परिजन भी वहां पहुंचे – उन्हें भी कानून की जानकारी दी गई और समझाइश दी गई।
परिणाम सकारात्मक रहा। दोनों पक्षों ने अपनी गलती स्वीकार की और यह संकल्प लिया कि जब तक बालक की आयु 21 वर्ष पूर्ण नहीं हो जाती, विवाह संपन्न नहीं किया जाएगा। मौके पर ही परिजनों से औपचारिक घोषणा पत्र एवं राजीनामा पत्र भरवाया गया।
इस संयुक्त कार्रवाई में ग्राम के सरपंच, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, परियोजना अधिकारी (बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी), पुलिस प्रतिनिधि, संरक्षण अधिकारी, विधिक सह परिवीक्षा अधिकारी, सेक्टर पर्यवेक्षक एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन ने इस अवसर पर आम नागरिकों से अपील की है कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि एक दंडनीय अपराध भी है। यदि किसी को भी ऐसी किसी गतिविधि की जानकारी मिले, तो बिना देर किए “चाइल्ड हेल्पलाइन 1098” पर या संबंधित विभाग को सूचित करें – ताकि समय रहते एक बच्चे का भविष्य बचाया जा सके।





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