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बालको में काला दिवस: 4 श्रम कोड के खिलाफ संयुक्त यूनियनों का एकजुट विरोध – मजदूरों के अधिकार छिनने पर फूटा गुस्सा

कोरबा/बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। मजदूरों के हक की लड़ाई एक बार फिर सड़कों पर उतर आई। 1 अप्रैल 2026 को, जिस दिन केंद्र सरकार ने चार श्रम कोड को पूरे देश में लागू किया, उसी दिन बालको परसाभाटा के आजाद चौक पर संयुक्त यूनियनों ने इसे “काला दिन” घोषित कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संयुक्त राष्ट्र ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम में श्रमिकों का आक्रोश खुलकर सामने आया।

44 कानून, चार कोड – और मजदूर बेबस
केंद्र सरकार ने दशकों से चले आ रहे 44 श्रम कानूनों को समेटकर मात्र चार श्रम कोड में बदल दिया है। यूनियन नेताओं का आरोप है कि यह बदलाव मजदूरों के हित में नहीं, बल्कि उनके शोषण की नई इबारत लिखने के लिए किया गया है। फिक्स टर्म एम्प्लॉयमेंट लागू कर दिया गया है, यूनियन बनाने के अधिकार को कमजोर किया गया है और वर्षों की मेहनत से अर्जित श्रमिक अधिकारों को एक झटके में छीन लिया गया है।

नारों से गूंजा आजाद चौक
कार्यक्रम में सीटू के अध्यक्ष सुखेंदु घोष, एटक के महासचिव सुनील सिंह, उपाध्यक्ष पवन कुमार वर्मा, सीटू के महासचिव अमित गुप्ता, नागराज, नितेश, सुरेश साहू, एचएमएस के महासचिव संतोष प्रजापति सहित इंटक, नाम्स और तमाम यूनियनों के प्रतिनिधि एकजुट होकर उपस्थित रहे। केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी हुई और मांग की गई कि चारों श्रम कोड तत्काल रद्द किए जाएं तथा मजदूरों के पक्ष में नए और मजबूत कानून बनाए जाएं।

आगे और बड़ा आंदोलन की तैयारी
नेताओं ने चेतावनी दी कि यह तो बस शुरुआत है। आने वाले समय में परसाभाटा में एक बड़ी आमसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें आम मजदूरों और जनता को यह समझाया जाएगा कि ये चार श्रम कोड उनके जीवन और रोजगार के लिए कितने घातक हैं। संयुक्त मंच ने साफ कहा – इस लड़ाई को जीतना है तो एकजुटता ही एकमात्र हथियार है।
“मजदूर बंटेगा नहीं, शोषण सहेगा नहीं” – यही संदेश परसाभाटा के आजाद चौक से पूरे कोरबा में गूंजा।”

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