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छत्तीसगढ़ के धान के कटोरे में अफीम की खेती! कोरबा में कांग्रेस का हल्ला-बोल; जयसिंह अग्रवाल का भाजपा पर तीखा प्रहार

“सत्ता के संरक्षण के बिना नशे का कारोबार संभव नहीं”- अफीम की अवैध खेती को लेकर कांग्रेस का भाजपा कार्यालय का घेराव, पुलिस से झूमाझटकी।

कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ की शांत आबोहवा और यहां की सियासत में ‘अफीम की खेती’ ने एक नया भूचाल ला दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर शुक्रवार को कोरबा जिला कांग्रेस ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के नेतृत्व में टी.पी. नगर स्थित भाजपा कार्यालय का घेराव कर जोरदार हल्ला बोला। यह आक्रोश दुर्ग जिले के समोदा गांव और बलरामपुर के सनाटोली के जंगलों में कथित तौर पर चल रही अफीम की अवैध खेती और नशे के सौदागरों को मिल रहे सत्ता के संरक्षण के खिलाफ था।

बैरिकेड्स टूटे, पुलिस से हुई झूमाझटकी
विरोध प्रदर्शन की तपिश इतनी तेज थी कि पुलिस प्रशासन को भाजपा कार्यालय से काफी पहले ही तीन स्तरीय बैरिकेडिंग करनी पड़ी। हाथों में तख्तियां लिए और सत्ता के खिलाफ नारेबाजी करते कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हुजूम जब आगे बढ़ा, तो पुलिस के साथ उनकी तीखी नोकझोंक और झूमाझटकी हुई। सड़क पर उतरे कांग्रेसियों के उग्र तेवर ने साफ कर दिया कि वे इस मुद्दे पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।

‘धान का कटोरा’ क्या अब अफीम के लिए पहचाना जाएगा?
पूर्व मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता जयसिंह अग्रवाल ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली को सीधे कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने एक बेहद चुभता हुआ सवाल उठाते हुए कहा, “बिना सत्ता के संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर अवैध कार्य संभव ही नहीं है।” अग्रवाल ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि पूरे देश में अपनी उर्वरता के लिए ‘धान का कटोरा’ कहलाने वाला छत्तीसगढ़, अगर ऐसे ही चलता रहा, तो जल्द ही ‘अफीम की खेती’ के लिए कुख्यात हो जाएगा। पिछले चार सालों से चल रही अफीम की खेती ने प्रशासन के खुफिया तंत्र और कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

‘गुणवत्तापूर्ण शराब’ और ‘अफीम की खेती’- आखिर यह कौन सी गारंटी है?
जयसिंह अग्रवाल ने कोरबा विधायक और प्रदेश के आबकारी मंत्री पर गहरा तंज कसा। उन्होंने उस विडंबना को उजागर किया जहां एक ओर सरकार ‘नशा मुक्ति अभियान’ का ढिंढोरा पीटती है, वहीं दूसरी ओर जिला जनसंवाद जैसे मंचों से ‘गुणवत्तापूर्ण शराब’ उपलब्ध कराने के वादे किए जाते हैं। उन्होंने तीखा सवाल दागा, “शराब की गुणवत्ता सुधारने की बात और अब यह अफीम की खेती… आखिर यह सरकार की किस गारंटी का हिस्सा है?” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर खुद इस बात को स्वीकार कर चुके हैं, जो साबित करता है कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सिस्टम की सबसे बड़ी नाकामी है।

मुख्य आरोपियों को बचाने और ग्रामीणों को फंसाने का आरोप
प्रदर्शन के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर ने सीधा आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े कुछ रसूखदार नेता भोले-भाले ग्रामीणों को डरा-धमका कर यह अवैध कारोबार चला रहे हैं। वहीं, ग्रामीण अध्यक्ष मनोज चौहान ने पुलिस की जांच पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि प्रशासन असली सरगना को बचाने के लिए गरीब नौकरों को ‘बलि का बकरा’ बना रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में लीपापोती की गई, तो कांग्रेस पूरे प्रदेश में चरणबद्ध और उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी।

इस उग्र और प्रभावशाली प्रदर्शन में कांग्रेस के कई दिग्गज चेहरे मौजूद रहे। जिनमें पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद, पूर्व सभापति श्याम सुंदर सोनी, प्रदेश सचिव विकास सिंह, महिला कांग्रेस अध्यक्ष कुसुम द्विवेदी, पूर्व अध्यक्ष नत्थूलाल यादव, सपना चौहान, उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह ठाकुर, दुष्यंत शर्मा, महामंत्री मनहरण राठौर, नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू सहित सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल थे।

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