होमआसपास-प्रदेशअंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सम्मान एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सम्मान एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित

कृषि विकास में महिलाओं की भूमिका पर हुआ सार्थक मंथन


रायपुर(पब्लिक फोरम) । अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र सर्व कर्मचारी कल्याण संघ के महिला प्रकोष्ठ द्वारा एक गरिमामय “महिला सम्मान एवं संवाद कार्यक्रम” का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र रायपुर मे किया गया। कार्यक्रम में कृषि विकास में महिलाओं के अमूल्य योगदान, महिला वैज्ञानिकों की उपलब्धियों तथा ग्रामीण विकास में उनकी भूमिका पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती कौशल्या साय जी, अध्यक्षा के रूप में श्रीमती ममता चंदेल, विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती दीपा दीपक तथा कृषि वैज्ञानिक डॉ. नीता खरे की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का प्रारंभ स्वागत उद्बोधन से हुआ, जिसमें डॉ. प्रमिला जोगी द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र की भूमिका एवं उपलब्धियों का परिचय प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात डॉ. ललिता रामटेक ने कृषि विज्ञान केंद्रों की कार्यप्रणाली, किसानों के लिए संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन तथा कृषि नवाचारों पर आधारित विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। वहीं डॉ. नीता खरे ने अपने विचार रखते हुए महिला उत्थान में कृषि विज्ञान केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। अपने उद्बोधन में विशिष्ट अतिथि श्रीमती दीपा दीपक ने कहा कि भारतीय कृषि व्यवस्था की वास्तविक शक्ति महिलाएं हैं।

खेत से लेकर अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक महिलाओं की सक्रिय भागीदारी कृषि को नई दिशा दे रही है। महिला किसान एवं महिला वैज्ञानिक कृषि उत्पादन, पोषण सुरक्षा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इस अवसर पर श्रीमती मनीषा नाग (लेखा नियंत्रक) ने अपने वक्तव्य में कहा कि महिला वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी से कृषि विज्ञान केंद्रों की कार्यक्षमता और प्रभावशीलता निरंतर बढ़ रही है। डॉ. नीता खरे ने अपने विस्तृत उद्बोधन में कहा कि महिला वैज्ञानिक कृषि अनुसंधान और विस्तार के क्षेत्र में निरंतर नए आयाम स्थापित कर रही हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षा श्रीमती ममता चंदेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज महिला वैज्ञानिक कृषि अनुसंधान, उन्नत प्रौद्योगिकी के विकास, जैविक खेती, पोषण उद्यान, उद्यमिता विकास तथा किसान प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण समाज में परिवर्तन ला रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की क्षमता को पहचान कर उन्हें अवसर प्रदान करना ही सशक्त समाज की आधारशिला है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या साय जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि भारतीय कृषि की रीढ़ महिलाओं का परिश्रम, समर्पण और ज्ञान है। महिला वैज्ञानिकों और महिला किसानों की साझेदारी से कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ये केंद्र किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण एवं वैज्ञानिक सलाह प्रदान कर ग्रामीण प्रगति के सशक्त मंच के रूप में कार्य कर रहे हैं।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि देशभर में स्थापित 731 कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन एवं वैज्ञानिक सलाह प्रदान की जा रही है। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के कृषि विज्ञान केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य के लिए अग्रणी माने जाते हैं तथा इन्हें कई बार राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। कार्यक्रम के दौरान महिला वैज्ञानिकों ने यह भी उल्लेख किया कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है, किन्तु उन्हें कई संस्थागत चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से कृषि विज्ञान केंद्रों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों से संबंधित वेतन विसंगति एवं अन्य सेवा लाभों की लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान की आवश्यकता पर बल दिया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र सर्व कर्मचारी कल्याण संघ (महिला प्रकोष्ठ) ने विश्वविद्यालय प्रशासन एवं राज्य शासन से आग्रह किया कि कृषि विज्ञान केंद्रों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की वेतन एवं सेवा लाभ संबंधी समस्याओं के स्थायी समाधान हेतु राज्य शासन के साथ सहमति (Concurrence) किया जाए, ताकि इस महत्वपूर्ण कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। इससे विशेष रूप से महिला वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों को कार्यस्थल पर स्थिरता और प्रोत्साहन प्राप्त होगा। कार्यक्रम के अंत में डॉ. आरती टिकरिया द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया तथा सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि महिलाओं की प्रतिभा, नवाचार और नेतृत्व क्षमता के बल पर भारतीय कृषि को और अधिक समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments