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IRIS Dena हमला: CPI ने की कड़ी निंदा, भारत सरकार से मांगा स्वतंत्र और सिद्धांत आधारित रुख

कोरबा (पब्लिक फोरम)। हिंद महासागर की लहरों में एक खौफनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है। श्रीलंका के तट से मात्र 40 समुद्री मील की दूरी पर – यानी भारत की सीमाओं के ठीक पड़ोस में – ईरान के नौसैनिक जहाज IRIS Dena को अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा डुबोए जाने की खबर ने दुनिया भर में सनसनी फैला दी है। इस हमले में 100 से अधिक ईरानी नाविकों की जान जाने की आशंका जताई जा रही है।
यह जहाज विशाखापट्टनम में आयोजित संयुक्त नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के बाद वापस लौट रहा था – ठीक उसी वक्त यह हमला हुआ।

इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के जिला सचिव पवन कुमार वर्मा ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की। उन्होंने इस हमले को “क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए सीधा खतरा” करार देते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की।

हिंद महासागर – युद्ध का मैदान नहीं
CPI ने साफ शब्दों में कहा कि दक्षिण एशिया के इतने करीब समुद्री क्षेत्रों में अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच टकराव का यह विस्तार अत्यंत चिंताजनक और खतरनाक है। पार्टी का मानना है कि हिंद महासागर में किसी भी प्रकार की सैन्य आक्रामकता न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून को कुचलती है, बल्कि इस क्षेत्र में रहने वाले करोड़ों लोगों की जीवन, आजीविका और सुरक्षा को भी संकट में डालती है।
पार्टी ने स्पष्ट किया – “हिंद महासागर को किसी भी कीमत पर युद्ध का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाना चाहिए।”
CPI ने भारत सरकार से एक कड़ा और स्पष्ट सवाल पूछा है – क्या भारत के बंदरगाहों और लॉजिस्टिक सुविधाओं का इस्तेमाल उन ताकतों को दिया जाएगा, जो हमारे पड़ोस में इस तरह की विध्वंसक कार्रवाइयाँ अंजाम दे रही हैं?

पार्टी ने सरकार से अपील की है कि वह भारत की ऐतिहासिक गुटनिरपेक्षता, रणनीतिक स्वायत्तता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति पर अडिग रहे। किसी भी विदेशी सैन्य बल को भारतीय ज़मीन या सुविधाओं का उपयोग इस तरह करने की अनुमति देना, भारत को एक बड़े और खतरनाक युद्ध का हिस्सा बना सकता है – जो देश के हित में कतई नहीं होगा।

IRIS Dena पर यह कथित हमला महज एक सैन्य घटना नहीं है – यह एक भू-राजनीतिक चेतावनी है। यह घटना बताती है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा टकराव अब दूर के समंदरों से निकलकर भारत के दरवाजे तक आ पहुँचा है। ऐसे में भारत का मौन या तटस्थता की आड़ में चुप्पी साधना, खुद उसके लिए घातक हो सकता है।
CPI ने यह संदेश साफ दे दिया है – भारत को अपनी आवाज़ उठानी होगी, और वह आवाज़ शांति, संप्रभुता और सिद्धांतों की होनी चाहिए।

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