मंगलवार, फ़रवरी 24, 2026
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मनरेगा को कमजोर किए जाने के विरोध में कांग्रेस का आंदोलन: 24 फरवरी को कोरबा कलेक्टर कार्यालय का घेराव

कोरबा (पब्लिक फोरम)। मनोज चौहान एवं मुकेश राठौर ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में “सुधार” के नाम पर रोजगार गारंटी योजना को कमजोर करने की नीति अपनाई जा रही है, जो सीधे तौर पर ग्रामीण गरीबों के जीवन और आजीविका पर प्रहार है। इसी के विरोध में 24 फरवरी 2026, मंगलवार को दोपहर 2 बजे कोरबा कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

जिला कांग्रेस अध्यक्षद्वय ने स्पष्ट किया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना देश के करोड़ों श्रमिक परिवारों के लिए सम्मानजनक आजीविका का प्रमुख साधन रही है। किंतु वर्तमान परिस्थितियों में बजट कटौती, भुगतान में देरी और प्रक्रियात्मक जटिलताओं के कारण यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटकती दिखाई दे रही है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियां रोजगार सृजन की भावना के विपरीत हैं और इससे ग्रामीण बेरोजगारी तथा आर्थिक असुरक्षा और बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि मजदूरों, किसानों और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए जनहित में उठाया गया कदम है। कांग्रेस का मानना है कि मनरेगा को कमजोर करना सामाजिक न्याय और संविधान की भावना के खिलाफ है।

इस आंदोलन में जिला कांग्रेस कमेटी के साथ-साथ महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ, अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ, अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, ब्लॉक कांग्रेस, मंडल कांग्रेस, वार्ड कमेटी एवं बूथ कमेटियों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त पार्षद, पूर्व पार्षद, पूर्व एल्डरमेन तथा विभिन्न मोर्चा संगठनों के प्रतिनिधियों से भी समय पर उपस्थित होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की गई है।

जिला कांग्रेस नेतृत्व ने सभी कार्यकर्ताओं से अनुशासन और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का आग्रह करते हुए कहा कि यह घेराव लोकतांत्रिक तरीके से जनता की आवाज को प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक मनरेगा को मजबूत करने और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

यह आंदोलन न केवल कोरबा जिले की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि ग्रामीण रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रीय विमर्श को भी नई दिशा देने की क्षमता रखता है।

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