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गुरूवार, जनवरी 22, 2026
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प्रगतिशील साहित्य जगत को दोहरा आघात: वीरेंद्र यादव और प्रो.राजेन्द्र कुमार के निधन पर शोक सभा आयोजित

दुर्ग (पब्लिक फोरम)। प्रगतिशील साहित्य और वैचारिक आंदोलन के क्षेत्र में सक्रिय लेखकों, शिक्षकों और चिंतकों के लिए यह समय गहरे शोक का है। राष्ट्रीय प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष मंडल के सदस्य, सुप्रसिद्ध आलोचक और निर्भीक वक्ता वीरेंद्र यादव (लखनऊ) तथा जन संस्कृति मंच के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष, कवि-आलोचक, संपादक और लोकप्रिय शिक्षक प्रो. राजेन्द्र कुमार (इलाहाबाद) के आकस्मिक निधन से साहित्यिक जगत में शून्य उत्पन्न हो गया है।

बीते वर्ष और इस वर्ष की शुरुआत में कई महत्वपूर्ण साथियों के असामयिक अवसान ने प्रगतिशील खेमे को भीतर तक झकझोर दिया है। इस क्रम में वीरेंद्र यादव और प्रो. राजेन्द्र कुमार का जाना केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि वैचारिक हस्तक्षेप, निर्भीक आलोचना और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लेखन की एक सशक्त परंपरा का अपूरणीय नुकसान है।

दोनों ही व्यक्तित्वों ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रगतिशील लेखन, शिक्षा, चिंतन और वैचारिक साहित्यिक आंदोलन को दिशा देने में उल्लेखनीय योगदान दिया। वीरेंद्र यादव अपनी स्पष्ट वैचारिकता, प्रखर वक्तृत्व और हस्तक्षेपकारी आलोचना के लिए जाने जाते थे, जबकि प्रो. राजेन्द्र कुमार ने शिक्षक, संपादक और विचारक के रूप में पीढ़ियों को प्रभावित किया और जन संस्कृति मंच को वैचारिक मजबूती प्रदान की।

इन दोनों दिवंगत साहित्यकारों की स्मृति को समर्पित शोक सभा का आयोजन 19 जनवरी, सोमवार को संध्या 6 बजे, प्रो. सियाराम शर्मा के निवास, इस्पात नगर, रिसाली में किया गया है। शोक सभा में जन संस्कृति मंच, प्रगतिशील लेखक संघ और जनवादी लेखक संघ से जुड़े साहित्यकारों के साथ-साथ अनेक सुधि नागरिकों की उपस्थिति प्रस्तावित है।

आयोजकों ने बताया कि यह सभा न केवल श्रद्धांजलि का अवसर होगी, बल्कि उन वैचारिक मूल्यों को स्मरण करने का भी मंच बनेगी, जिनके लिए वीरेंद्र यादव और प्रो. राजेन्द्र कुमार आजीवन प्रतिबद्ध रहे। उनका योगदान स्मृतियों में जीवित रहेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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