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गुरूवार, जनवरी 22, 2026
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कोरबा: बालको में ‘रोजी-रोटी’ पर संकट; पूर्व मंत्री जयसिंह का अल्टीमेटम – गरीबों को उजाड़ा तो होगा महा-आंदोलन

कोरबा (पब्लिक फोरम)। औद्योगिक नगरी बालको की फिजाओं में इन दिनों बारूद-सी गंध है। यह गंध किसी विस्फोट की नहीं, बल्कि उस असंतोष की है जो सैकड़ों गरीब परिवारों के दिलों में सुलग रही है। दशकों से बालको की सड़कों पर छोटी-सी दुकान, ठेला और गुमटी लगाकर अपने बच्चों का पेट पाल रहे मेहनतकश लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। वजह है – वेदांता समूह (बालको प्रबंधन) का वह ‘फरमान’, जिसने इन गरीबों की नींद उड़ा दी है।

प्रबंधन ने छोटे व्यापारियों को जमीन खाली करने का नोटिस थमाया है। इस फैसले के खिलाफ अब सियासी और सामाजिक विरोध का बिगुल फूंक दिया गया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल ने मौके पर पहुँचकर न केवल पीड़ितों का दर्द साझा किया, बल्कि प्रबंधन को कड़े शब्दों में चेतावनी भी दी है।

वेदांता शोषण का नया अध्याय?
आरोप है कि बालको प्रबंधन का रवैया पिछले कुछ समय से स्थानीय लोगों के प्रति बेहद सख्त और कथित तौर पर ‘अमानवीय’ रहा है। विगत जुलाई 2025 से सेवानिवृत्त कर्मचारियों का भुगतान रोक कर, चिकित्सा सुविधा बंद कर के, बिजली-पानी और शौचालय सुविधा काटकर उनके नाम पर आवंटित आवास से उन्हें बलपूर्वक बाहर खदेड़ने जैसे प्रताड़नापूर्ण कदमों के बाद, अब प्रबंधन की नजर उन छोटे दुकानदारों पर है जो मोची, नाई, रजाई बनाने वाले या चाट-सब्जी बेचने वाले हैं। पीड़ितों का कहना है कि यह नोटिस उनके लिए ‘मृत्यु-पत्र’ समान है, क्योंकि उनके पास आजीविका का कोई दूसरा सहारा नहीं है।

पूर्व मंत्री का ‘ग्राउंड जीरो’ से अल्टीमेटम
बुधवार को जब पीड़ित दुकानदार अपनी व्यथा लेकर जयसिंह अग्रवाल के पास पहुँचे, तो वे तत्काल बालको नगर पहुंचे। उन्होंने जी-9 परियोजना स्थल, दोंदरो साइड स्थित स्टॉप डैम और राखड़ बांध (Ash Dam) क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया।

विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए श्री अग्रवाल के तेवर बेहद तल्ख थे। उन्होंने कहा, “विकास के नाम पर गरीबों के पेट पर लात मारना किसी भी सभ्य समाज को स्वीकार नहीं होगा। जो हाथ दशकों से मेहनत कर इस शहर को सेवा दे रहे हैं, हम उन्हें उजड़ने नहीं देंगे। यदि प्रबंधन ने जबरन किसी को हटाया, तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर प्रशासन तक उग्र आंदोलन करेगी।”

प्रबंधन पर गंभीर सवाल: नियम ताक पर?
निरीक्षण के दौरान स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए, जो जांच का विषय हैं:-

🔹रास्तों की तालाबंदी: आरोप है कि जिन सड़कों का उपयोग जनता 40-45 वर्षों से कर रही थी, उन्हें प्रबंधन ने मनमाने ढंग से बंद कर दिया है।
🔹जहरीला पानी: निरीक्षण में पाया गया कि ‘बेल्लिगरी नाले’ में राखड़ बांध का प्रदूषित पानी छोड़ा जा रहा है। मजबूरी में बस्ती के लोग और मवेशी इसी जहरीले पानी का उपयोग कर रहे हैं, जो स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है।
🔹पर्यावरण की बलि: जी-9 परियोजना के लिए हरे-भरे पेड़ों की कटाई और ड्रेनेज सिस्टम को अवरुद्ध करने की बात भी सामने आई है।

प्रशासन को हस्तक्षेप की सलाह
पूर्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि बिना वैधानिक अनुमति और पर्यावरणीय स्वीकृति के हो रहे निर्माण कार्य अवैध हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने दो टूक कहा, “कोई भी उद्योग कानून और जनहित से ऊपर नहीं हो सकता।”

इस विरोध प्रदर्शन में बालको चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सुमेर डालमिया, प्रदेश सचिव बी.एन. सिंह और विकास सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर, महिला कांग्रेस अध्यक्ष कुसुम द्विवेदी, पूर्व अध्यक्ष सपना चौहान, नत्थूलाल यादव, ब्लॉक अध्यक्ष पालूराम साहू, बसंत चंद्रा, ए.डी. जोशी, नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, पार्षदगण सहित लगभग 500 से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ता और बालको के प्रभावित नागरिक, प्रबंधन के खिलाफ लामबंद नजर आए।

यह मामला अब केवल ‘जमीन खाली कराने’ का नहीं, बल्कि ‘अस्तित्व और अधिकार’ की लड़ाई बन चुका है। बालको प्रबंधन अपने फैसले पर अडिग रहता है या जनविरोध के आगे झुकता है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। फिलहाल, बालको के सैकड़ों गरीब परिवारों की उम्मीदें अब इस राजनीतिक लड़ाई के अंजाम पर टिकी हैं।

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