कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ की ‘ऊर्जाधानी’ कोरबा में सियासी हलचल तेज होने वाली है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी आगामी 13 जनवरी, मंगलवार को कोरबा के एक दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं। उनका यह दौरा केवल राजनीतिक रस्म अदायगी नहीं है, बल्कि इसमें जनसरोकार, संघर्ष और सेवा का संगम देखने को मिलेगा। जोगी जहां एक ओर पार्टी संगठन में नई जान फूंकने के लिए नए कार्यालय का उद्घाटन करेंगे, वहीं दूसरी ओर वेदांता समूह की बालको कंपनी के खिलाफ स्थानीय जनता की आवाज बनकर मोर्चा भी संभालेंगे।
बालको के खिलाफ हुंकार और संगठन को धार
जानकारी के मुताबिक, अमित जोगी 13 जनवरी को दोपहर 1:30 बजे सड़क मार्ग से कोरबा पहुंचेंगे। उनके आगमन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है।
🔸नए कार्यालय का उद्घाटन: दोपहर 2:00 बजे वे निहारिका क्षेत्र में पार्टी के नए जिला कार्यालय का फीता काटेंगे। स्थानीय नेता अजय कुमार के नेतृत्व में कार्यकर्ता इस आयोजन को भव्य बनाने की तैयारियों में जुटे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कार्यालय के माध्यम से अमित जोगी जिले में पार्टी की सक्रियता बढ़ाकर कार्यकर्ताओं को एकजुट करना चाहते हैं।
🔸औद्योगिक अन्याय के खिलाफ आवाज: इस दौरे का सबसे आक्रामक पहलू बालको (वेदांता) के खिलाफ उनका रुख होगा। अमित जोगी जनहित के मुद्दों और स्थानीय लोगों की समस्याओं को लेकर प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी खबर है जो लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
🔸राजनीति से परे: सेवा और संवाद
राजनीतिक शोर-शराबे के बीच अमित जोगी के इस दौरे में एक मानवीय पहलू भी जुड़ा है।
🔸कुष्ठ आश्रम में सेवा: दोपहर 2:30 बजे वे स्थानीय कुष्ठ आश्रम पहुंचेंगे। कड़कड़ाती ठंड के बीच वे वहां के जरूरतमंदों को कंबल वितरित करेंगे और उनका दुख-दर्द साझा करेंगे। राजनीति में अक्सर मानवीय संवेदनाएं पीछे छूट जाती हैं, लेकिन आश्रम का यह दौरा यह संदेश देने की कोशिश है कि नेतृत्व का असली मतलब समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के साथ खड़ा होना है।
🔸मीडिया से रूबरू: अपने दौरे के अंत में, दोपहर 3:00 बजे वे कोरबा प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा करेंगे। इस दौरान वे न केवल स्थानीय समस्याओं पर बेबाकी से राय रखेंगे, बल्कि प्रदेश की बदलती राजनीतिक हवा का रुख भी स्पष्ट करेंगे।
उम्मीदों का नया सवेरा
अमित जोगी का यह दौरा महज एक यात्रा नहीं, बल्कि कोरबा के राजनीतिक और सामाजिक पटल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की एक कोशिश है। बालको के खिलाफ उनका सख्त रुख और कुष्ठ रोगियों के प्रति उनकी संवेदनशीलता यह बताती है कि वे विपक्ष की भूमिका को पूरी गंभीरता से निभाना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि 13 जनवरी को ऊर्जाधानी से उठी यह आवाज प्रदेश की राजनीति में कितनी दूर तक गूंजती है।





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