कांकेर (पब्लिक फोरम)। नगर पालिका परिषद कांकेर में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। पिछले तीन महीनों से अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष कर रहे कर्मचारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय कर्मचारी संघ (कांकेर इकाई) ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) को 6-सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि 2 जनवरी तक उनकी मांगे पूरी नहीं हुईं, तो 5 जनवरी से शहर की सफाई और अन्य व्यवस्थाएं ठप हो सकती हैं।
शोषण और गुलामी के आरोपों से गरमाया माहौल
यूनियन के अध्यक्ष राकेश बिछिया और महासचिव दिलीप साहू ने एक संयुक्त बयान में प्रशासन और प्लेसमेंट एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि अधिकारी और एजेंसी मिलकर कर्मचारियों का आर्थिक और मानसिक शोषण कर रहे हैं। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अधिकारी हमें कर्मचारी नहीं बल्कि गुलाम समझते हैं। हमसे काम तो पूरा लिया जाता है, लेकिन जब हमारे कानूनी हक और अधिकारों की बात आती है, तो मैनेजमेंट मौन साध लेता है।”
ये हैं प्रमुख मांगें:
कर्मचारियों ने अपने मांग पत्र में निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है:
🔸बकाया बोनस का तत्काल भुगतान।
🔸 हर माह निर्धारित समय पर वेतन का मिलना।
🔸ईएसआई (ESI) पहचान पत्रों में व्याप्त त्रुटियों का सुधार।
🔸प्रतिमाह वेतन पर्ची (Salary Slip) का अनिवार्य वितरण।
श्रम कानूनों के उल्लंघन का आरोप
इस पूरे विवाद के केंद्र में ‘बोनस’ का मुद्दा सबसे अहम है। यूनियन नेताओं ने सीएमओ पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अधिकारी श्रम कानूनों की रक्षा करने के बजाय प्लेसमेंट एजेंसी के ‘प्रवक्ता’ की तरह काम कर रहे हैं। आरोप है कि सीएमओ ने बोनस भुगतान के लिए एजेंसी को पत्र लिखने से यह कहकर मना कर दिया कि इससे एजेंसी को वित्तीय नुकसान होगा।
यूनियन ने याद दिलाया कि नियमानुसार यदि प्लेसमेंट एजेंसी बोनस नहीं देती, तो मुख्य नियोक्ता होने के नाते यह जिम्मेदारी नगर पालिका की है। अधिकारियों का यह रवैया न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना है, बल्कि गरीब कर्मचारियों के हक पर डाका डालने जैसा है।
अंतिम चेतावनी: 2 जनवरी तक का समय
कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया है कि वे शहर की शांति और व्यवस्था भंग नहीं करना चाहते और अब तक बहुत ही संयम से काम लिया है। लेकिन, अब उनकी सहनशीलता की सीमा समाप्त हो गई है। यदि 2 जनवरी तक उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर निराकरण नहीं किया गया, तो 5 जनवरी से सभी प्लेसमेंट कर्मचारी अनिश्चितकालीन आंदोलन पर चले जाएंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।





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