रायगढ़ (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में औद्योगिक विकास और आदिवासियों के ‘जल, जंगल, जमीन’ के संघर्ष के बीच एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। तमनार थाना क्षेत्र के कसडोल निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता राजेश सिंह मरकाम ने पुलिस प्रशासन पर ही अपनी और अपने परिवार की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखे एक पत्र में दावा किया है कि तमनार थाना प्रभारी और उनके पति ने उन्हें फोन पर न केवल अश्लील गालियां दीं, बल्कि एनकाउंटर या सड़क दुर्घटना में मारने की धमकी भी दी है।
क्या है पूरा मामला? (घटनाक्रम)
यह विवाद जिंदल पॉवर लिमिटेड, तमनार के संयंत्र एवं खनन विस्तार के लिए आयोजित जनसुनवाई से जुड़ा है। स्थानीय ग्रामीण और सामाजिक संगठन इस विस्तार का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। इसी क्रम में आज, 27 दिसंबर 2025 को विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और जनता के बीच झड़प हो गई। इस झड़प में कई ग्रामीणों के साथ-साथ तमनार थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों को चोटें आईं।
प्रार्थी राजेश सिंह मरकाम का कहना है कि हिंसा की इस घटना में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, वे केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जनता की आवाज उठा रहे थे।
धमकी और दहशत का वह फोन कॉल
पुलिस अधीक्षक को भेजी गई शिकायत के अनुसार, घटना के बाद राजेश सिंह के मोबाइल पर एक फोन आया, जिसने उनके पूरे परिवार को दहशत में डाल दिया है। राजेश ने आरोप लगाया है कि:-
धमकी का आरोप: थाना प्रभारी श्रीमती कमला पुसाम ठाकुर के पति कुंदन ठाकुर ने अपने मोबाइल नंबर (9329042000) से राजेश को फोन किया। उन्होंने बेहद आपत्तिजनक और अश्लील गालियों का प्रयोग करते हुए कहा, “बहुत बड़ा नेता बनता है, तेरे कहने पर आंदोलन हो रहा है… तू जहां मिलेगा, तुझे और तेरे परिवार को जान से मार देंगे या गाड़ी चढ़ा देंगे।”
टीआई पर आरोप: राजेश का दावा है कि इसके तुरंत बाद फोन थाना प्रभारी कमला पुसाम ठाकुर को दिया गया। आरोप है कि महिला अधिकारी ने भी उन्हें मां-बहन की गालियां दीं और धमकी देते हुए कहा कि अगर आंदोलन बंद नहीं किया तो झूठे केस में फंसा दिया जाएगा या दुर्घटना दिखाकर हत्या करवा दी जाएगी।
खाकी से ही लगा डर, तो कहां जाएं?
इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि एक नागरिक, जिसे सुरक्षा के लिए पुलिस के पास जाना चाहिए था, वह पुलिस थाने जाने से ही डर रहा है। राजेश सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्हें थाने जाकर रिपोर्ट लिखाने में अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। उन्हें डर है कि वहां जाते ही उन्हें किसी झूठे मामले में गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
मजबूरी में उन्होंने सोशल मीडिया और डाक के माध्यम से गृह मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय और पुलिस महानिदेशक (DGP) को अपनी शिकायत भेजी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि यदि उनके या उनके परिवार के साथ कोई भी अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी थाना प्रभारी, उनके पति और शासन-प्रशासन की होगी।
एक सामाजिक कार्यकर्ता की पीड़ा और सवाल
यह घटना सिर्फ एक धमकी नहीं, बल्कि लोकतंत्र में उठने वाली आवाजों को दबाने के प्रयास की ओर इशारा करती है। राजेश सिंह मरकाम जैसे कार्यकर्ता, जो संविधान के दायरे में रहकर अपने समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ते हैं, आज अपनी ही सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।


जिंदल पॉवर लिमिटेड के खिलाफ पहले भी आवाज उठाने पर उन पर मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिसे वे दबाव में की गई कार्रवाई बताते हैं। आज जब एक आदिवासी समुदाय का व्यक्ति प्रशासन से न्याय की गुहार लगाता है और बदले में उसे ‘गाड़ी चढ़ा देने’ की धमकी मिलती है, तो यह सिस्टम की संवेदनशीलता पर गहरा सवाल खड़ा करता है।
फिलहाल, यह मामला अब उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया है। देखना यह होगा कि रायगढ़ पुलिस अधीक्षक इस बेहद गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं। क्या एक सामाजिक कार्यकर्ता को सुरक्षा मिलेगी, या फिर उनकी आवाज को भय के साये में दबा दिया जाएगा? यह घटना प्रशासन की निष्पक्षता और आम आदमी के विश्वास की कड़ी परीक्षा है।





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